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हर औरत कुछ अलग चाहती है

Last Updated: शुक्रवार, 8 जुलाई 2016 (13:30 IST)
-रैचेल नूवर
औरतें क्या चाहती हैं? सदियों से ये सवाल आम आदमी से लेकर, मनोवैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों तक को तंग करता रहा है। सिगमंड फ्रायड जैसे महानतम मनोवैज्ञानिक हों या हॉलीवुड के अभिनेता मेल गिब्सन, सब इस सवाल को लेकर परेशान रहे हैं।
इस पहेली के बारे में हज़ारों क़िताबें, लेख, ब्लॉग पोस्ट लिखे जा चुके हैं। लाखों बार इस मसले पर बहस हो चुकी है। मर्द ही क्यों, ख़ुद महिलाएं भी इस मसले पर अक्सर चर्चा करती पाई जाती हैं।
 
मगर, इस पर लंबी चौड़ी चर्चाओं, हज़ारों क़िताबों, बरसों की रिसर्च के बावजूद औरतों की ख़्वाहिश की कोई एक परिभाषा, कोई एक दायरा तय नहीं हो पाया है। और न ही ये तय हो पाया है कि आख़िर उनके अंदर ख़्वाहिश जागती कैसे है? उन्हें किस तरह से संतुष्ट किया जा सकता है?
 
हालांकि बरसों की मेहनत बर्बाद हुई हो, ऐसा भी नहीं है। आज हम काफ़ी हद तक महिलाओं की संबंधी ख़्वाहिशों को समझ सकते हैं। महिलाओं की कामेच्छा के बारे में पहले के बंधे-बंधाए ख़्यालों के दायरे से बाहर आ रहे हैं। पहले कहा जाता था कि महिलाओं की चाहत कभी पूरी नहीं की जा सकती। वो सेक्स की भूखी हैं। उनमें ज़बरदस्त काम वासना है।
 
लेकिन, अब वैज्ञानिक मानने लगे हैं कि औरतों की सेक्स की चाहत को किसी एक परिभाषा के दायरे में नहीं समेटा जा सकता। ये अलग-अलग औरतों में अलग-अलग होती है। और कई बार तो एक ही स्त्री के अंदर, सेक्स की ख़्वाहिश के अलग दौर पाए जाते हैं।
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