क्या ये नया गर्भ निरोधक साबित होगा?

पुनः संशोधित मंगलवार, 16 मई 2017 (12:13 IST)
जंगली पौधों से मिलने वाले दो रसायन गर्भनिरोध के फौरी उपायों का अच्छा विकल्प बन सकते हैं। बस एक छोटी-सी शर्त है। अगर वैज्ञानिकों को केवल इतना पता चल जाए कि बड़ी तादाद में ये कहां मिलेंगे।
डैन्डलाइन या कुकरौंधा (सिंहपर्णी) के पौधे की जड़ और 'थंडर गॉड वाइन' के पौधे पारंपरिक दवाओं में लंबे समय से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। अब कैलिफ़ोर्निया के वैज्ञानिकों ने ये पाया है कि ये पौधे प्रजनन की प्रक्रिया को भी रोक सकते हैं।

रिसर्च रिपोर्ट : इस पर एक ब्रितानी शुक्राणु विशेषज्ञ का कहना है कि ये खोज पुरुष गर्भनिरोधकों की दिशा में नया मोड़ साबित हो सकती है।
हालांकि कैलिफ़ोर्निया में इस पर काम कर रही रिसर्च टीम ने बताया कि पौधे में इस रसायन की इतनी कम मात्रा मौजूद रहती है कि इसे पौधे से निचोड़कर अलग करना बेहद ख़र्चीला होगा। टेस्ट में ये देखा गया कि प्रिस्टिमेरिन और लुपेओल ने शुक्राणु को अंडाणु तक पहुंचने से रोक दिया।

नेशनल एकैडमी ऑफ़ साइंसेज़ के जर्नल 'प्रोसीडिंग्स' में छपी रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है, "ये केमिकल्स एक तरह से 'मॉलिक्यूलर कॉन्डम' की तरह काम कर रहे थे।"
पारंपरिक दवाएं : दूसरे शब्दों में कहें तो ये केमिकल्स शुक्राणु को नुकसान पहुंचाए बगैर प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन को रोकने में कामयाब थे। इसी हार्मोन की वजह से शुक्राणु तैरते हैं।

लुपेओल केमिकल आम, डैन्डलाअन या कुकरौंधा (सिंहपर्णी) के पौधे की जड़ और ऐलो वेरा के पौधों में पाया जाता है। जबकि प्रिस्टिमेरिन ट्रिप्टेरीजिअम विलफ़ोर्डी प्लांट (थंडर गॉड वाइन) से निकाला जाता है। पारंपरिक चीनी दवाओं में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि ये केमिकल्स कम ख़ुराक पर ही असरदार हैं और दूसरे हॉर्मोन आधारित गर्भनिरोधकों के विपरीत इनका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है।
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