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ब्लॉग: 'दरअसल आपकी ब्रा की स्ट्रिप दिख रही है'

Last Modified:?> Wednesday, 19 April 2017 (11:12 IST)
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- वंदना 
"दरअसल आपकी ब्रा की दिख रही है"…। रोज़ाना की अभी ख़त्म ही हुई थी कि एक वरिष्ठ साथी ने मुझे कोने में ले जाते हुए ये बात कही। उनके चेहरे पर शिकन थी। ये एक संस्थान में पत्रकारिता में मेरे शुरुआती दिनों की बात है।
 
मैं नई नवेली थी, कुछ नया और अच्छा करने की चाह लिए और उत्साह से भरी हुई मैं उस मीटिंग में गई थी। वहाँ उस समय और कोई महिला पत्रकार मौजूद नहीं थी। जैसे ही मेरे सीनियर ने मुझसे दबी आवाज़ में ब्रा वाली बात कही, मैं एक बार के लिए घबरा सी गई। लगा कोई बड़ी ग़लती हो गई हो। और मेरे से ज़्यादा शायद वो शख़्स घबराया हुए था कि ये उन्होंने क्या देख लिया।
 
बात करने में शर्म : सच कहूँ कि तो उस समय मुझे कुछ समझ नहीं आया था कि मैं कैसे रिएक्ट करूँ। एक नौसिखिए पत्रकार को नौकरी में ऐसे सवाल से भी दो चार होना पड़ेगा इसकी तालीम मुझे मेरी यूनिवर्सिटी ने नहीं दी थी।
 
वैसे भी बचपन से ही लड़कियों को सिखाया जाता है कि अंडरगार्मेंट वगैरह पर बात करना शोभा नहीं देता...मानो वो कोई सीक्रेट हथियार हो जिसे महिलाओं को उठाना पड़ता है।। और किसी को मालूम नहीं होना चाहिए कि वो हथियार महिला के पास है। और अगर किसी को पता चल गया तो ग़ज़ब हो जाएगा।
 
कम से छोटे कस्बों और शहरों में तो लड़कियों को इन चीज़ों का सामना करना पड़ता है। मेरा अपना वास्ता एक छोटे से टाउनशिप से है- नंगल जो भाखड़ा डैम के पास बसा है। और मैंने ये चीज़ें वहाँ बड़े होते हुए महसूस की हैं। घरों में भी तो जब लड़कियों को अंडरगार्मेंट सुखाने होते हैं तो उन्हें तार पर किन्हीं दूसरे कपड़ों के नीचे सुखाया जाता है कि कहीं कोई देख न ले। जबकि हाईजीन के हिसाब से इन कपड़ों को हवा और धूप की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।
ब्रा की स्ट्रिप या....
ख़ैर उन साहब की बात पर लौटते हैं जिन्होंने मेरी ब्रा की स्ट्रिप की ओर मेरा ध्यान दिलाया था। सोचती हूँ कि उस सुबह की संपादकीय मीटिंग में जब सब देश- दुनिया के संगीन मुद्दों, राजनीति, कूटनीति, कला, खेल पर चर्चा कर रहे थे, तो क्या उस पूरी कवायद में सिर्फ़ यही बात ध्यान देने लायक रही होगी कि किसी महिला कर्मचारी के कमीज़ या टॉप के किसी कोने से ब्रा का एक अंश दिख रहा है?
 
बरसों बाद जब अचानक मुझे ये क़िस्सा यादा आया तो एक बार तो मुझे गुस्सा आया लेकिन हैरानी नहीं हुई। आख़िर हमारी सामाजिक कंडिशनिंग ही ऐसी होती है कि इन मुद्दों को हौवे की तरह पेश किया जाता है। शायद उस व्यक्ति की कंडिशनिंग भी वैसी ही हुई होगी।
 
क्या होगा मेरा जवाब : मैं आज इतने बरस बाद सोचती हूं कि अब कोई मुझसे ऐसा कहे तो मेरा रिएक्शन क्या होगा?
 
आज मेरे साथ कुछ ऐसा हो, तो शायद मैं अपने तरीके से सामने वाले को जवाब दे पाउँगी जो उस दिन नहीं दे पाई थी। और जाते-जाते ज़िक्र उस घटना का जिसकी वजह से मुझे ये बरसों पुरना वाक्या याद आया।
 
एक बेवसाइट पर एक लॉज़री कंपनी के बारे में रिपोर्ट छपी थी कि कैसे उसने अपने ब्रा का नाम रखा है- Approved by the boss। और अगर ब्रा में किसी को इतनी ही दिलचस्पी है तो उन अभियानों के बारे में गूगल पर खोज कर पढ़िए जहाँ महिलाओं ने ब्रा को विरोध का हथियार बनाया और कई लड़ाइयाँ लड़ीं।
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