भोजन में ख़ून लेने से जुड़ी पांच बातें, जिनसे आप बेख़बर हैं

पुनः संशोधित गुरुवार, 1 नवंबर 2018 (12:32 IST)
- टिम हेवार्ड और एवा ओंटिवेरोस

चेफ़ टिम हेवार्ड ने बीबीसी के फ़ूड प्रोग्राम में एक अनोखी चुनौती स्वीकार की है। वो ख़ून को एक बार फिर खाने के टेबल पर लाने जा रहे हैं। ब्लैक पुडिंग से लेकर ख़ून से बने केक तक पेश हैं। ख़ून को में शामिल करने के बारे में पांच बातें जिनसे आप बेख़बर हैं।

1. ब्लैक पुडिंग
क्या आपने कभी इंग्लिश ब्रेकफ़ास्ट खाया है? इसका मतलब आप ब्लैक पुडिंग को अलग करने वाले से अनजान नहीं हैं। ब्रिटेन की मिठाई ब्लैक पुडिंग ताज़ा से बनाई जाती है। कुछ ब्लैक पुडिंग 95 प्रतिशत ख़ून से बनाई जाती है। इसे आप पसंद भी कर सकते हैं और इससे नफ़रत भी कर सकते हैं, जो आपका दिन भी निर्धारित करता है।

दुनिया के अधिकांश खाद्य संस्कृति में ख़ून की तरह सॉस का इस्तेमाल किया जाता है: बोतिफ़रा नेगरा (कैटलोनिया), द्रिशीन (आयरलैंड), बुदिन न्वार (फ्रांस), मॉर्सिला (स्पेन), मस्टमाकारा (फ़िनलैंड), मोरोंगा (सेंट्रल अमेरिका), ब्लुतुर्स्ट (जर्मनी) और सैंग्वनासिओ (इटली), ऐसे ही बहुत से नाम हैं।


ताइवान में ब्लड पुडिंग को झु झ़ी गाओ कहा जाता है, जो और भी ज्यादा शानदार होता है। ये लकड़ी की एक छोटी-सी स्टिक में लाया जाता है। ये चावल के साथ सुअर का उबला हुआ खून, मूंगफली के पाउडर का स्वादिष्ट मिश्रण है।

लेकिन अगर आप सॉसेज़ से बचना चाहते हैं तो इसके अलावा और भी विकल्प हैं। दक्षिण पूर्व एशिया और चीन के हिस्सों में आप ज़्यु दोफ़ु का मज़ा ले सकते हैं। लाल रंग तोफ़ु खून का बना होता है, जो या तो बत्तख का होता है या मुर्गे का। आपको कौन सा खाना है ये आपकी मर्जी पर है।


थाईलैंड में नम तोक के मज़े ले सकते हैं। नूडल सूप जिसे गाय या सूअर के कच्चे ख़ून के साथ दिया जाता है। यदि भारत में इस तरह के खाने का मज़ा लेना चाहते हैं तो आपको तमिलनाडु होकर आना चाहिए, जहां भेड़ के बच्चे के खून को गरम तेल में निकाला जाता है। या आप वियतनाम भी जा सकते हैं, जहां आप वहां का लोकप्रिय सूप बो ह्यु का स्वाद चख सकते हैं, जो मसालेदार चावल और सुअर के ख़ून से बना होता है।

2. रक्तपात
दुनिया भर में घुमंतू जनजातियों के बीच रक्तपात की एक आम प्रथा है- पोषक तत्वों के लिए किसी जानवर को बिना मारे उसके ख़ून का थोड़ा सा हिस्सा लिया जाता है। रक्त का स्वाभाविक रूप से शरीर में भरना। यायावर समूह जानवरों पर निर्भर रहते हैं और इनका इस्तेमाल खाने, घूमने या लड़ाई के लिए इस्तेमाल करते हैं।


उप-सहारा अफ़्रीका में अभी कई जनजातियां हैं जो मवेशिया का रक्तपात करती हैं। जैसे कीनिया के मसाई जनजाति और दक्षिण-पश्चिमी इथियोपिया के मैदानों में सूरी जनजाति। रक्त को निकालने और पीने से पहले गाय के गले को छेद दिया जाता है। मवेशियों को मारे बिना ये ऊर्जा हासिल करने का एक प्रभावी तरीक़ा माना जाता है।

3. बैकिंग में ख़ून का इस्तेमाल
पुडिंग बैकर्स के लिए- अंडे की जगह ब्लड को विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, इससे भी उतना ही प्रोटीन मिलता है। कनेडियन शेफ़ जेनिफ़र मेक्कलेगन ने हाल ही में ब्रिटेन की ऑक्सफ़र्ड सिंपोसियम में ख़ून को एक घटक के रूप में इस्तेमाल करने पर एक वार्ता की थी।

ख़ून का इस्तेमाल केक, ब्राउनी, आइसक्रिम, शरबत, कॉकटेल आदि के लिए किया जाता है। जानकार बताते हैं कि ख़ून और कोकोआ का मिश्रण विशेष स्वाद बनाता है, जो बाल्टिक और रूस के हिस्सो में मिलने वाली 'हेमटोगीन' चॉकलेट में भी इस्तेमाल किया जाता है।


4. वैम्पायर से जुड़ा झूठ
रक्त-चूसने वाली वैम्पायर की आधुनिक छवि और डरावनी छवि वाला एक लोकप्रिय व्यक्ति, जिसे माना जाता है कि पूर्वी यूरोप में 18 वीं शताब्दी की शुरुआत में आया था।

उस हिंसात्मक समय में वैम्पायर की कहानियां जंगल की आग के तरह फैली और इसे पूरे यूरोप और दुनिया के बाक़ी हिस्सों में फैलने में ज़्यादा समय नहीं लगा। 'वैम्पायरिक' कार्यक्रम की एक श्रृंखला के बाद इससे जुड़ी मिथक कहानियां प्रचलित हुई, जैसे मुर्दा की तरफ बढ़ते हुए उसके बाल और नाखून आदि।


5. ड्रैकुला
ब्लड-बफ़ सर क्रिस्टोफ़र फ्रेलिंग के अनुसार, 'Vampyres (वैम्प्यिर्स)' के लेखक, कई हॉरर फिल्म्स ने वैम्पायर को खून पीते हुए गलत दिखाया है।

नोस्फेरातु एक हॉरर फिल्म हैं जिसमें एक ड्रैकुला है, जिसके नकली दांत हैं ताकि वो किसी का ख़ून पी आसानी से पी सके। हालांकि जल्द ही लोग उसे भूल भी गए। लेकिन अगर आप ख़ून को चखना चाहते हैं तो आप अपने घर पर उससे बने पकवान खा सकते हैं या ब्लैक पुडिंग बना सकते हैं।


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