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वह प्राचीनतम दिव्य मंत्र जो मानव ने धन पाने के लिए बोला था

धन-धान्य और सुख समृद्धि के लिए सदियों से मानव ईश्वर की आराधना करता रहा है। ग्रंथों में सबसे प्राचीन ऋग्वेद में यह वर्णन मिलता है कि लक्ष्मी पति भगवान विष्णु से मानव ने आर्थिक कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना की थी। प्रस्तुत है प्राप्ति का वह सबसे पुराना मंत्र हिन्दी अर्थ सहित् जो ऋ्ग्वेद में लिखा है।  
`ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। 
भूरिरेदिन्द्र दित्ससि। 
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। 
आ नो भजस्व राधसि।।´ 
ऋग्वेद (4/32/20-21)
भावार्थ : हे लक्ष्मीपते ! आप दानी हैं, साधारण दानदाता ही नहीं बहुत बड़े दानी हैं। 
 
आप्तजनों से सुना है कि संसार भर से निराश होकर जो याचक आपसे प्रार्थना करता है, उसकी पुकार सुनकर उसे आप आर्थिक कष्टों से मुक्त कर देते हैं - उसकी झोली भर देते हैं। हे भगवान,  मुझे अर्थ संकट से मुक्त कर दो।
 
इस मंत्र का प्रात:काल प्रतिदिन दीपक जलाकर जाप करने से आर्थिक संकटों से राहत मिलती है। 
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