रेवती नक्षत्र

बुध के नक्षत्र रेवती में जन्मा प्रत्येक क्षेत्र में सफल

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आकाश मंडल में अंतिम नक्षत्र है। यह मीन राशि में आता है। इसे दे, दो, चा, ची के नाम से जाना जाता है। रेवती नक्षत्र का स्वामी बुध है। बुध बुद्धि का कारक होने के साथ इसे वणिक ग्रह माना गया है। राशि स्वामी गुरु है। गुरु बुध की युति जिस भाव में होगी वैसा फल देगा। बुध-गुरु की युति वाला जातक विवेकवान, वणिक, सफल अधिवक्ता, व्यापारी भी होता है।

मेष लग्न में नक्षत्र स्वामी बुध, तृतीय हो व गुरु नवम पंचम, लग्नमें हो तो ऐसे जातक स्वयं भाग्य के निर्माता होते हैं। ऐसे जातक धर्म-कर्म को मानने वाले, उत्तम वक्ता व मित्रों से लाभ पाने वाले होते हैं।

वृषभ लग्में बुध, द्वितीय, पंचम, नवम, चतुर्थ में हो व गुरु एकादश, तृतीय, चतुर्थ, सप्तम में हो तो शुभ फलदायी होकर उस जातक को विद्वान संतान से प्रसिद्धि दिलाता है। स्वयं भी प्रतिभाशाली होता है।

मिथुन लग्न में नक्षत्र स्वामी बुध लग्न, चतुर्थ, तृतीय, नवम में गुरु तृतीय, षष्ठ, एकादश, सप्तम, दशम भाव में हो तो ऐसा जातक पत्नी, राज्य, पराक्रम से उन्नति पाता है। ऐसा जातक राजनीतिक भी होता है।

कर्क लग्न में बुध, द्वादश, तृतीय, द्वितीय, दशम में गुरु लग्न, पंचम, नवम, दशम में हो तो ऐसा जातक भाग्यवान, प्रभावशील, विद्या, संतान से लाभ पाने वाला विदेशों से लाभ पाने वाला भाइयों से सुखी रहता है।

Author पं. अशोक पँवार 'मयंक'|
सिंह लग्में नक्षत्र स्वामी बुध एकादश भाव में हो तो ऐसा जातक धन-धान्य से पूर्ण होता हैं। लग्न, द्वितीय भाव में शुभ फलदायी रहेगा। राशि स्वामी गुरु लग्न, पंचम, नवम, चतुर्थ, द्वादश में हो तो ऐसा जातक भाग्यशाली, विद्वान, प्रभावशील सुख-संपन्न वाला होगा।


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