पानी में तैर रहा है चमत्कारिक पत्थर

तैरते पत्थर को देखने हेतु उमड़ी भीड़

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मांडू (धार) के में एक के पानी में तैरने पर भीड़ जुट रही है। इसका वजन करीब 15 किलो है। यहाँ के महंत ने पत्थर को रामेश्वरम से प्राप्त किया है। पुराणों में इसी तरह के पत्थरों का उपयोग में होने का उल्लेख मिलता है।
इस संबंध महंत त्रिलोकीदास ने बताया कि यह पत्थर लंबे प्रयासों के बाद प्राप्त हुआ है। यह नवंबर में हुए मानस सम्मेलन में लाया गया था। इसका उपयोग रामायणकाल में संभवतः रामसेतु के लिए किया गया होगा। चमत्कारिक पत्थर को रामशिला का नाम दिया है। मांडू में आने वाले दर्शनार्थी एवं पर्यटक इसे और भी अच्छे से जान सकें, इसलिए शीघ्र ही छोटा कुंड बनाएँगे या म्यूजियम एवं अन्य समुचित प्रबंध करेंगे। तैरते हुए पत्थर को भगवान का स्वरूप मानकर लोग उसकी आरती एवं पूजा के साथ मन्नत भी माँग रहे हैं।
महंतजी ने कहा कि यह पत्थर दुर्लभ है, जो विश्व में कुछ ही स्थानों पर पाया जा सकता है। इतना बड़ा पत्थर तैरते हुए पहली बार देखा है। इधर जैसे-जैसे लोगों को जानकारी मिल रही है, वे मंदिर पहुँच रहे हैं। उत्सुक लोग पत्थर को पानी में डुबाते हैं, तो वह पुनः ऊपर आने लगता है। श्रद्घालु मुकेश लोधी के अनुसार मुझे यकीन नहीं हुआ, लेकिन अपनी जिज्ञासा दूर करने के लिए मैं मंदिर आया और यहाँ देखा तो वाकई पत्थर तैर रहा था।
एक अन्य श्रद्घालु राहुल यादव ने बताया कि मैं नहीं मानता था कि दुनिया में चमत्कार है, पर इस घटना को देखने के बाद मैं विश्वास करने लगा हूँ।

धरमपुरी के दीपक पंडित ने बताया कि पत्थर के तैरने की जानकारी मिलने पर मैं उत्सुक होकर यहाँ पहुँचा हूँ। विशाल तपेले में इतने भारी पत्थर को देख मैं दंग रह गया।


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