कमाई की रेस में सचिन नंबर वन

भाषा| पुनः संशोधित बुधवार, 26 दिसंबर 2007 (14:41 IST)
दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई ने 2007 में कमाई की नई बुलंदियों को छुआ तो ट्वेंटी-20 विश्व कप जीतकर कई युवा खिलाड़ी भी करोड़पति बन गए। लेकिन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर की ब्रांड वैल्यू की बराबरी करना इस साल भी अन्य क्रिकेटरों के लिए सपना ही रहा।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने टीम के प्रयोजन, किट प्रयोजन और मैचों के प्रसारण करार से इस साल 660 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की और इस मामले में यूवेंटस, चेल्सी और रीयाल मैड्रिड जैसे यूरोप में कई बड़े फुटबॉल क्लबों को पीछे छोड़ दिया।

सहारा ग्रुप ने भारतीय टीम के प्रायोजन के लिए चार साल का करार 313 करोड़ रुपए में किया है जबकि नाईकी को पाँच साल के लिए प्रयोजन करार के लिए 196.6 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
हालाँकि बोर्ड की कमाई का तीन चौथाई हिस्सा प्रसारण करार से आ रहा है, जिसके लिए निम्बस, बीसीसीआई को 2714 करोड़ रुपए दे हरा है। यह करार पाँच साल का है।

वेस्टइंडीज में आयोजित विश्व की विफलता के बाद बोर्ड ने दक्षिण अफ्रीका में ट्वेंटी-20 विश्व कप के लिए अनुभवी खिलाड़ियों की जगह युवा शेरों को परखने का फैसला किया और महेन्द्र सिंह धोनी की अगुवाई में टीम ने खिताब जीतकर बोर्ड को निराश नहीं किया।
ट्वेंटी-20 विश्व कप की जीत के लिए भारतीय टीम पर लक्ष्मी मेहरबान हुई और बीसीसीआई ने विश्व चैम्पियन टीम को 20 लाख डॉलर के पुरस्कार से नवाजा। बीसीसीआई के पुरस्कार और टूर्नामेंट की इनामी राशि से टीम का हर सदस्य करोड़पति बन गया। इसके अलावा राज्यों में सरकारों ने भी अपने खिलाड़ियों पर धन वर्षा की।

वेस्टइंडीज में टीम की विफलता से निराश विज्ञापन उद्योग ने एक बार फिर क्रिकेटरों को सर आँखों पर बैठा लिया और विश्व चैम्पियन टीम के खिलाड़ियों की कीमत रातोंरात आसमान छूने लगी। ट्वेंटी-20 की सफलता के बाद कप्तान धोनी प्रत्येक करार के लिए लगभग एक करोड़ रुपए लेने लगे जो अब एक करोड़ 75 लाख रुपए के करीब पहुँच गया है।
उनका प्रबंधन करने वाली कोलकाता की कंपनी गेमप्लान स्पोर्ट के मुताबिक उनके पास 12 अनुबंध हैं। इस तरह वह विज्ञापनों से लगभग 12 करोड़ की कमाई कर रहे हैं जो पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ की प्रायोजनों से होने वाली कमाई के बराबर है।

विश्व कप की खिताबी जीत के बाद गौतम गंभीर ने प्रत्येक करार के लिए अपनी कीमत दोगुनी करते हुए 20 लाख रुपए लेने शुरू कर दिए।
ट्वेंटी-20 विश्व कप से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले रोहित शर्मा (पहले 10 लाख) और दिनेश कार्तिक (पहले 15 लाख) प्रत्येक करार के लिए 30 लाख रुपऐ ले रहे हैं, जबकि श्रीसंत को 15 लाख के फायदे के साथ 40 लाख रुपए मिल रहे हैं।

इसके अलावा बीसीसीआई ग्रेड 'ए' के क्रिकेटर को सालाना 50 लाख, ग्रेड 'बी' के क्रिकेटर को 35 लाख और ग्रेड 'सी के क्रिकेटर को 20 लाख रुपए की रिटेनर राशि भी देता है।
पूर्व कप्तान सौरव गांगुली विभिन्न कंपनियों के साथ अपने प्रायोजनों से सालाना लगभग 15 करोड़ रुपए की कमाई करते हैं, लेकिन वह भी मास्टर ब्लास्टर से काफी पीछे हैं जिनकी विज्ञापनों से कमाई लगभग 20 करोड़ रुपए है।

तेंडुलकर को हालाँकि भविष्य में सिक्सर किंग युवराजसिंह से चुनौती मिल सकती है जो अभी एक विज्ञापन के लिए लगभग एक करोड़ रुपए ले रहे हैं। लेकिन दाएँ हाथ का यह बल्लेबाज अगर टेनिस स्टार महेश भूपति की स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी ग्लोबोस्पोर्ट के साथ करार कर लेता तो वह तेंडुलकर को पीछे छोड़ सकता है।
ग्लोबोस्पोर्ट दस साल के करार के लिए इस क्रिकेटर को लगभग दो सौ करोड़ रुपए देने को तैयार है। युवराज का परसेप्ट मैनेजमेंट कंपनी के साथ करार समाप्त हो गया है लेकिन कानूनी विवाद के चलते वह नया करार नहीं कर पा रहे हैं।

राष्ट्रीय टीम के अलावा रणजी खिलाड़ियों को बागी इंडियन क्रिकेट लीग की मौजूदगी का फायदा मिला। अपने खिलाड़ियों को आईसीएल में जाने से रोकने के लिए बीसीसीआई ने घरेलू मैचों के लिए खिलाड़ियों को प्रतिदिन मिलने वाली 16000 रुपए की राशि को बढ़ाकर 35000 रुपए कर दिया जिससे एक औसत खिलाड़ी भी एक सत्र में आसानी से दस से 15 लाख रुपए की कमाई करने के करीब पहुँच गया है।
बोर्ड ने इसके अलावा रणजी ट्रॉफी की इनामी राशि भी बढ़ाकर चार करोड़ 20 लाख रुपए कर दी है।

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