अंतरराष्ट्रीय स्वरूप लेगा अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय

भोपाल| Last Updated: शनिवार, 12 सितम्बर 2015 (22:17 IST)
भोपाल। दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के समापन अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के प्रयास किए जाएंगे।
 
उन्होंने कहा कि देश के इस एकमात्र हिन्दी विश्वविद्यालय में 200 से अधिक पाठयक्रम संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज 'प्रशासन में हिन्दी सत्र' अनेक सारगर्भित निष्कर्षों के साथ संपन्न हुआ। सत्र में आज 32 अनुशंसा और 51 सुझाव प्रस्तुत किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोझिल सा दिखने वाला यह विषय इतनी सरलता, सहजता, लोकप्रियता और अनुशासन के दायरे में रोचकता के साथ संपन्न हुआ।
 
प्रसिद्ध व्यंग्यकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. हरीश नवल के संयोजकत्व में संपन्न सत्र के वक्ताओं के व्याख्यान और उपस्थित विद्वानों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर आज प्रतिवेदन तैयार किया गया, जो अग्रिम कार्यवाही के लिए भारत सरकार को भेजा जाएगा। प्रतिवेदन तैयार करने वालों में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, डॉ. रामलखन मीणा, श्रीमती पूनम जुनेजा, प्रो. एम.पी. शर्मा, प्रो. चन्द्रकला पाड़िया, प्रो. बी.के. कुठियाला और सत्यनारायण जटिया शामिल थे।
 
एनटीपीसी दिल्ली के हिन्दी विभाग प्रभारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने 'प्रशासनिक हिन्दी शब्दावली की विशेषताएँ आवश्यकता', राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. रामलखन मीणा ने 'प्रशासनिक हिन्दी : व्यवहारिक संदर्भ', संयुक्त सचिव, राजभाषा विभाग भारत सरकार की श्रीमती पूनज जुनेजा ने 'प्रशासनिक गतिविधियों और राजभाषा का नीति निर्धारण', प्रो. एम.पी. शर्मा ने 'प्रशासन में हिन्दी का कार्यान्वयन : मुद्दे और चुनौतियाँ', बीकानेर के गंगा शरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. चंद्रकला पाड़िया ने 'कार्यालयीन हिन्दी और अनुवाद की समस्या', माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रो. बी.के. कुठियाला ने 'अन्य भाषा-भाषी प्रान्तों से आए प्रशासनिक अधिकारियों के लिए हिन्दी शिक्षण व्यवस्था', पूर्व सांसद डॉ. सत्यनारायण जटिया ने देश में किए गए विभिन्न निरीक्षणों के आधार पर 'प्रशासन में हिन्दी' की सहजता, सरलता और सुदृढ़ता संबंधी अनुशंसाएँ दीं। राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, प्रो. बी.के. कुठियाला, पूर्व सांसद डॉ. सत्यनारायण जटिया ने प्रतिवेदन तैयार किया। प्रतिवेदन भारत शासन को भेजा जाएगा। जहाँ समिति द्वारा उन पर विचार करने के बाद लागू किया जाएगा।
 
आज आए विशेष सुझावों में राजभाषा अधिनियम उल्लंघन के लिए दण्ड का प्रावधान, राज्यों में पदनामों की एकरूपता, राजभाषा अधिकारी पद पर पदोन्नति चैनल बनाने, राजभाषा नीति नियम में परिवर्तन, निजी क्षेत्रों में हिन्दी कार्यान्वयन लागू करने, बच्चों के हिन्दी पाठयक्रम में देश की अन्य भाषाओं के व्यावहारिक ज्ञान को पाठयक्रम में शामिल करने, हिन्दी अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के स्थान पर सीधे नियुक्ति, कम्प्यूटर में हिन्दी की-बोर्ड का प्रयोग, प्रशासन से जनता को जोड़ने वाली हिन्दी आदि शामिल है।
 
मुख्यमंत्री चौहान ने इस अवसर पर संस्कृति विभाग की पुस्तक 'गरूड़' और मुस्लिम साहित्यकारों की रचनाओं पर आधारित 'हिन्दी हैं हम' पुस्तक का विमोचन भी किया। अवसर परमुख्य सचिव अन्टोनी डिसा, प्रमुख सचिव संस्कृति मनोज श्रीवास्तव के साथ देश-विदेश के हिन्दी विद्वान इस  उपस्थित थे। 

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