विश्व हिन्दी सम्मेलन : अंग्रेजी में गर्व और हिन्दी में शर्म क्यों

भोपाल| पुनः संशोधित शनिवार, 12 सितम्बर 2015 (20:44 IST)
भोपाल। दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के तीसरे दिन 'हिन्दी पत्रकारिता और संचार माध्यमों में भाषा की शुद्धता' पर गत दिवस हुए विचार-विमर्श का प्रतिवेदन वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा ने प्रस्तुत किया। सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका श्रीमती मृणाल पाण्डे ने की। सत्र में वरिष्ठ और नरेन्द्र कोहली ने भी सुझाव दिए।
 
श्रीमती पाण्डे ने कहा कि शुद्धतावाद के प्रति अतिआग्रही नहीं होना चाहिए। यह साहित्य में तो संभव है, पत्रकारिता में नहीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन सौमनस्य और विचारों का वाहक बनेगा।
 
कोहली ने कहा कि जब तत्कालीन शासकों ने फारसी और अंग्रेजी को शासन की भाषा बनाया तो वर्तमान में हिन्दी को क्यों नहीं बनाया जा सकता।
 
राहुल देव ने कहा कि अंग्रेजी में गर्व और हिन्दी में शर्म क्यों? उन्होंने कहा कि सरकारी विज्ञापन और सम्प्रेषण में देवनागरी लिपि का प्रयोग हो, रोमन लिपि का नहीं। इस संबंध में विज्ञापनदाता और एजेंसी को सुझाव दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर अखबार की शैली नीति बनायी जाए। भाषा आयोग बनाया जाए।
 
प्रतिनिधियों ने प्रस्तुत प्रतिवेदन पर सुझाव और अनुशंसाएँ दी। उन्होंने कहा कि हिन्दी में क्रियाओं और सर्वनाम की त्रुटि को रोका जाए। हिन्दी को ज्ञान, विज्ञान, प्रबंधन, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी की भाषा बनाया जाए। फिल्मी हिन्दी नहीं सिखाई जाए। सूचना पट्ट शुद्ध हिन्दी में लिखे जाएं। 
 
प्रतिनिधियों ने कहा कि सिक्ख और मुस्लिम युवा हिन्दी पढ़ने लगे हैं। अत: हिन्दी समाचार-पत्रों में इनकी भाषाओं का भी समावेश होना चाहिए। भाषा अधिकार का अधिनियम भी लाया जाए। अनावश्यक रूप से अंग्रेजी के शब्दों के उपयोग को रोकना चाहिए। व्याकरण की शुद्धता पर ध्यान दिया जाए। (वेबदुनिया न्यूज)

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