महाकाल मंदिर में वैवाहिक परंपराएं आरंभ, शिवजी बने दूल्हा


दिव्य ज्योतिर्लिंग में 9 फरवरी से आरंभ हो गया है। पुजारी हल्दी-चंदन का उबटन लगाकर भगवान को वैवाहिक रस्मों से दूल्हा बनाएंगे। 9 दिन तक संध्या आरती के समय श्री महाकालेश्वर का नित नया श्रृंगार होगा। भगवान महाकाल के दिव्य रूप के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उमड़ना आरंभ हो गए हैं। देश-दुनिया के भक्त घर बैठे भी कर सकते हैं।  
 
शिव नवरात्रि उत्सव सिर्फ महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में मनाने की परंपरा है। 9 फरवरी को पहले दिन भगवान को हल्दी, चंदन तथा केसर के उबटन से स्नान करवा कर दूल्हा बनाया जाएगा। पश्चात चंदन का शृंगार कर नवीन वस्त्र सोला, दुपट्टा तथा जलाधारी में मेखला धारण करवाई जाएगी।
 
दूसरे दिन परंपरागत पूजन के बाद भगवान का शेषनाग श्रृंगार होगा। नवरात्रि के 9 दिनों में भगवान छबीना, घटाटोप, उमा-महेश, मनमहेश, चंद्रमौलेश्वर, शिवतांडव रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। शिवरात्रि को महानिशाकाल में महाकाल का विशेष पूजन होगा। इसके बाद भगवान का सप्तधान स्वरूप में श्रृंगार कर सिर पर फूलों का सेहरा तथा फलों का मुकुट सजाया जाएगा।
 
सोमवार से बदली महाकाल की दिनचर्या
 
शिव नवरात्रि के समय राजाधिराज की दिनचर्या में बदलाव होगा। प्रतिदिन शाम 5 बजे होने वाला संध्या पूजन दोपहर 3 बजे होगा। इसके बाद पूजन-अभिषेक तथा विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इससे पूर्व प्रतिदिन सुबह पुजारी नैवेध कक्ष में भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन करेंगे। पश्चात कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित भगवान श्री कोटेश्वर का पूजन-अभिषेक होगा। पुजारी गर्भगृह में रूद्रपाठ करेंगे।
 
पंचमुखारविंद दर्शन
 
शिवरात्रि के बाद दूज पर भगवान का पंचमुखारविंद श्रृंगार होगा। यह श्रृंगार वर्ष में सिर्फ एक बार होता है। शिव नवरात्रि में जो भक्त राजाधिराज के दर्शन नहीं कर पाए, वे दूज पर एक साथ विभिन्न रूपों के दर्शन कर धर्मलाभ ले सकते हैं।
 
शिव महिमा का गान
 
शिव नवरात्रि में पं.रमेश कानिटकर 107 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए शिव महिमा का पाठ करेंगे। 
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