महेश नवमी की प्रामाणिक कथा


 
 
 
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माहेश्वरी समाज के पूर्वज क्षत्रिय वंश के थे। एक दिन जब इनके  वंशज शिकार पर थे तो इनके शिकार की कार्यविधि से ऋषियों के यज्ञ में विघ्न उत्पन्न हो  गया, जिस कारण ऋषियों ने इन लोगों को श्राप दिया कि तुम्हारे वंश का पतन हो जाएगा।  माहेश्वरी समाज के पूर्वज इसी श्राप के कारण ग्रसित हो गए थे। 
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किंतु ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन भगवान शिवजी की कृपा से उन्हें श्राप से  मुक्ति मिल गई, तब भगवान शिवजी की आज्ञानुसार माहेश्वरी समाज ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य कर्म को अपना लिया, तब शिवजी ने माहेश्वरी समाज के पूर्वजों को अपना नाम दिया  इसलिए इस दिन से यह समाज 'माहेश्वरी' के नाम से प्रसिद्ध हुआ अत: आज भी माहेश्वरी  समाज वैश्य रूप में ही पहचाने जाते हैं।>  

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