इस बार का शुक्रवार सभी संप्रदायों के लिए जश्न मनाने की सौगात लेकर आ रहा है। शुक्रवार को जहाँ हर वर्ग को उत्सव मनाने का मौका मिलेगा, वहीं भारत के गंगा-जमुनी तहजीब का अनूठा संगम भी देखने को मिलेगा। यह ऐसा मौका है, जब होली, ईद मिलादुन्नबी, गुड फ्रायडे और नवरोज एक साथ होगा। त्योहारों के इस मिलन से जश्न मनाने का उत्साह चार गुना बढ़ जाएगा।
धर्म की व्याख्या करें तो पता चलता है कि यह लोगों की आस्था, विश्वास और परंपरा के साथ उनकी रीति-रिवाज और रूढ़ियों का सम्मिलित स्वरूप है। आइए जानते हैं इस अनूठे मौके पर इन चारों त्योहारों के बारे में -
ईद मिलादुन्नबी ईद मिलादुन्नबी हजरत मुहम्मद साहब का जन्मदिवस है। इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग उनकी शिक्षा और उपदेशों को याद करते हैं और उसे अपने जीवन में उतारने का प्रण करते हैं। मुहम्मद साहब का देहावसान भी इसी दिन हुआ था, जिसे बारावफात के नाम से जाना जाता है। ईद मिलादुन्नबी के मौके पर विशेष प्रार्थना का आयोजन होता है। यह त्योहार इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-उल-अवाल के बारहवें दिन मनाया जाता है। इस मौके पर यतीमों को दान दिया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है।
गुड फ्रायडे ईसा मसीह ने सूली पर चढ़ाए जाने के समय अपने अनुयायियों को उपदेश दिया था कि वे शत्रुओं से भी प्यार करें। गुड फ्रायडे इसी दिन यानी ईसा मसीह को सूली चढ़ाने के दिन मनाया जाता है, लेकिन इसके तीसरे दिन ईसा मसीह जीवित हो गए। यही दिन ईस्टर के रूप में मनाया जाता है।
गुड फ्रायडे को गुड इसलिए कहते हैं क्योंकि इस दिन ईसा मसीह ने सभी प्राणियों के पाप, बीमारी और दु:ख के लिए स्वयं सूली पर चढ़ना स्वीकार किया और अपने प्राण त्याग दिए। ईसाई धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है। | | शुक्रवार को जहाँ हर वर्ग को उत्सव मनाने का मौका मिलेगा, वहीं भारत के गंगा-जमुनी तहजीब का अनूठा संगम भी देखने को मिलेगा। यह ऐसा मौका है, जब होली, ईद मिलादुन्नबी, गुड फ्रायडे और नवरोज एक साथ होगा। |
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उनके सूली पर चढ़ने से लोगों में भारी संताप फैल गया। ठीक तीसरे दिन ईसा मसीह पुनर्जीवित हो गए। इस दिन को ईस्टर के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने पहाड़ी से लोगों को उपदेश दिया कि दूसरों से तुलना मत करो और ईश्वर पर भरोसा रखो। कल की चिंता मत करो। ईसा मसीह ने उपदेश दिया कि जैसा तुम दूसरों से व्यवहार की अपेक्षा करते हो, वैसा ही व्यवहार दूसरों के साथ करो।
नवरोज नवरोज पारसी समुदाय का त्योहार नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर समुदाय के देवता सूर्य और उनके प्रतीक अग्नि की पूजा की जाती है। पारसी धर्म की शिक्षा के तीन महत्वपूर्ण तत्व हैं- हुम्त, हुक्त और हवर्षत्र। हुम्त यानी पवित्र विचार, हुक्त यानी पवित्र वाणी और हवर्षत्र यानी पवित्र कर्म, इन तीनों से बुराई का नाश करो। घरों में विशेष भोज तैयार होता है। शाम को अग्नि मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है। महिला और पुरुष पारंपरिक परिधान पहनकर मंदिर जाते हैं, जहाँ पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। होली होली हिंदू समुदाय के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार वसंत के आगमन के रूप में मनाया जाता है। होली के दौरान प्रकृति में चारों ओर रौनक छा जाती है और माहौल रंगीन हो जाता है। इस अवसर पर समुदाय के स्त्री-पुरुष एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं और शुभकामनाएँ देते हैं। घरों में स्वादिष्ट पकवान बनते हैं। कुछ स्थानों पर मटकी फोड़ने का भी रिवाज है। होली पूरे भारत में मनाई जाती है। यह त्योहार अमूमन तीन दिन तक चलता है, लेकिन कुछ जगहों को छोड़कर रंगों की होली एक ही दिन मनाई जाती है।
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