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मुलाकात कीजिए ऐसे शहर से
जहाँ राजा रात नहीं बिताते
श्रुति अग्रवाल
Shruti AgrawalWD
आस्था और अंधविश्वास की इस कड़ी में इस बार हम आपके सामने लाए हैं एक ऐसा शहर जहाँ राजा रात नहीं बिताते। राजाओं को डर थकि यदि उन्होंने एक रात यहाँ बिताई तो उनसे उनका राज-पाठ छिन जाएगा। जी हाँ, उज्जैन शहर से एक पुरानी किवंदती जुड़ी हुई है कि उज्जैन का एक ही राजा है और वो है महाकाल। यहाँ मान्‍यता है कि महाकाल के अलावा यदि किसी दूसरे राजा ने उज्जैन में एक रात भी गुजारी तो उसका संपूर्ण राजपाट समाप्त हो जाएगा।
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सिंधिया राजघराने के राजा पहले भोर में ही उज्जैन आते और महाकाल के दर्शन के बाद राजकार्य निपटा कर रात होने से पहले ही उज्जैन की परिधी से बाहर चले जाते थे। जब यह सिलसिला राजकार्य में बाधा डालने लगा तब कालियादेह पैलेस का निर्माण कराया गया।
इसी किवदंती के कारण सिंधिया राजघराने के राजाओं ने अपने रहने के लिए उज्जैन की सीमा के बाहर कालियादेह पैलेस बनवाया था। राजा-महाराजाओं के काल में सिंधिया घराने के राजा ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से आने वाले राजा या ऊँचे ओहदेदार भी अवंतिका (उज्जैन का पुराना नाम) में रात नहीं बिताते थे। कहा जाता है जब से उज्जैन शहर पर सिंधियाघराने की राजशाही काबिज हुई तब ही से यहाँ राजाओं ने रात नहीं बिताई।

सिंधिया राजघराने के राजा पहले भोर में ही उज्जैन आते और महाकाल के दर्शन के बाद राजकार्य निपटा कर रात होने से पहले ही उज्जैन की परिधी से बाहर चले जाते थे। जब यह सिलसिला राजकार्य में बाधा डालने लगा तब कालियादेह पैलेस का निर्माण कराया गया।

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सर्वसुविधा युक्त इस महल में पानी की खास व्यवस्था कराई गई। महल के सामने ही जलकुंड है। साथ ही महल के अंदर ही सिंधियाघराने के अराध्य भगवान सूर्य का मंदिर भी बनवाया गया।

पैलेस के बनने के बाद राजा दिन-भर तो उज्जैन में राजकार्य में लगे रहते लेकिन दिन ढ़लते ही कालियादेह पैलेस की ओर लौट लेते। आजादी के बाद न तो राजा रहे न ही राजवाड़े लेकिन ऐसा नहीं कि इस किंवदंती का अंत हो गया हो। वर्तमान में भी बड़े सरकारी ओहदेदार और मंत्री उज्जैन में रात नहीं बिताते। शहर का सरकारी सर्किट हाऊस भी महाकाल के सम्मान में शहर सीमा से बाहर बनाया गया है।

Shruti AgrawalWD
महाकाल की सेवा करने वाले पुजारियों का दावा है कि हर बड़ा ओहदेदार व्यक्ति, व्यापारी या मंत्री जो भी उज्जैन की परिसीमा से होकर गुजरता है सबसे पहले महाकाल के सामने ही नतमस्तक होता है। सुबह की भस्मआरती में सिर झुकाने के बाद ही अपने कार्यों का संपादन करता है।
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