कल्पादि से बीते हुए वर्ष 1972949109 सृष्टि संवत् 1955885109 श्री विक्रम संवत् 2065 शक संवत् 1930 श्री कृष्ण जन्म संवत् 5244, कलि-संवत् 5109 वर्ष सन् 2008 वर्षारंभ में गुरु मान से विष्णु विंशति का प्लव नाम संवत्सर है। प्लव नाम संवत्सर में वर्षा बहुत होती है। ऐसा शास्त्रों में विधान है। कुछ स्थानों में बाढ़ का प्रकोप भी देखा जा सकता है। आमजन में रोग, क्षति, प्राकृतिक आपदा से फसलों व जनसमूह को हानि का सामना करना पड़ता है।
इस संवत् का राजा चंद्र मंत्री सूर्य सस्येश बुध, धान्येश चंद्र, मेद्येश शनि, रक्षेश गुरु, नीरसंश मंगल, फलेश शनि, धनेश मंगल व दुर्गेश शनि है। 1. जब राजा चंद्र हो तो जन सामान्य में मांगलिक व शुभ कार्य अधिक होते हैं। वर्षा के योग उत्तम व धन-धान्य की वृद्धि होती है। खेती किसानी वाले व आम जनता भी सुखी रहती है। सत्तापक्ष में परिवर्तन हो, नए नेतागण चुनकर आवें। 2. जब राजा सूर्य हो तो फल-फूल की आवक कम हो, दूध आदि कम हो। रोग, शोक बढ़े, आम जनता पीड़ित हो। अनाज कम हो, चोर, अग्नि, भय, अनैतिक कर्म, आकस्मिक घटना। विशिष्ट राजनेता का निधन होता है। 3. जब मंत्री सूर्य होता है तो चोरी चमारी की घटना अधिक हो रोग, शोक, शासकीय गतिविधियों से आम जनता दु:खी हो। धन-धान्य की समृद्धि हो। रस पदार्थ के संचय से लाभ होता है। | | कल्पादि से बीते हुए वर्ष 1972949109 सृष्टि संवत् 1955885109 श्री विक्रम संवत् 2065 शक संवत् 1930 श्री कृष्ण जन्म संवत् 5244, कलि-संवत् 5109 वर्ष सन् 2008 वर्षारंभ में गुरु मान से विष्णु विंशति का प्लव नाम संवत्सर है। |
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4. जब सस्येश बुध हो तो वर्षा अधिक होती है। जनता में सुख-समृद्धि बढ़ती है। उपद्रव शांत होते हैं। बुद्धिजीवी वर्ग की वृद्धि होती है। 5. जब धान्येश चंद्र हो तो जन वृद्धि हो, गेहूँ, तिल, तिलहन की फसलें अच्छी हो। गो दुग्ध व घी की प्रचुर मात्रा होती है। 6. जब मेद्येश शनि हो तब कुछ प्रांतों में वर्षा की कमी रहे, अकालग्रस्त क्षेत्र भी बने। शासक वर्ग के व्यवहार से जनता में असंतोष फैलता है व विविध रोग होते हैं। 7. जब रक्षेश गुरु हो तो जनता में सौहार्द बना रहे, फल-फूल, तृण, जड़ी-बूटियाँ अधिक हों। तालाबों में कमल खिलें, जलाशय भरे रहें। बुद्धिजीवी वर्ग का सम्मान हो, पशु धन में वृद्धि हो। 8. जब नीरसेश मंगल हो तब मूँगा, लाल वस्त्र, ताँबा, समस्त लाल वस्तुएँ महँगी होती हैं। 9. जब फलेश शनि हो तो फलों में रोग लगें। कृषक दु:खी हों, ओलावृष्टि से फसल को क्षति पहुँचे, रोग-शोक बढ़े। 10. जब धान्येश मंगल हो तो वायदा एवं हाजिर के व्यापार में तेजी-मंदी रहे। ऋतुएँ बिगड़ें, शासक वर्ग से जनता दु:खी हो। 11. दुर्गेश शनि का फल जातिवाद, धर्मांधता के कारण लड़ाई, झगड़े हों, जनता पलायन करे।
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