अँगरेजों के शासनकाल में भारत की आजादी की माँग का समर्थन करने वाली श्रीला फ्लेदर को अंदाजा भी नहीं था कि आगे चलकर वे खुद इंग्लैंड की राजनीति का हिस्सा बनेंगी और ब्रिटेन की संसद में पहुँचने वाली अल्पसंख्यक समुदाय की पहली महिला होंगी। श्रीला फ्लेदर कंजरवेटिव पार्टी की ओर से 1990 में ब्रितानी संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सदस्य बनीं और इस तरह उन्हें बैरोनेस फ्लेदर कहा जाने लगा।