पीपल (पिप्पली)

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परिचय : यह मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है बड़ी और छोटी। वैसे निघण्टु में चार जातियां बताई जाती हैं- (1) पिप्पली (2) गज पिप्पली (3) सैंहली और (4) वन पिप्पली।

भारत में इसकी पैदावार उष्ण प्रदेशों यथा बंगाल, बिहार, असम, पूर्वी नेपाल, कोंकण से त्रावणकोर तक पश्चिमी घाट के वन, मलेशिया, इण्डोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका तथा निकोबार द्वीप समूह में होती है। तमिलनाडु की अन्नामलाई पहाड़ियों तथा असम के चेरापूंजी क्षेत्र में इसकी खेती आन्ध्र के विशाखापत्तनम्‌ जिले के पहाड़ी इलाके में की जाती है।
उपयोग
पिप्पली क्वाथ : पीपर 20 ग्राम जौकुट (मोटा-मोटा) कूटकर एक गिलास पानी में डालकर उबालें। जब आधा पानी बचे तब उतारकर छान लें। इसके तीन भाग करके, एक-एक भाग, ठण्डा ही दिन में 3 बार, सुबह-दोपहर-शाम, एक चम्मच शहद डालकर पिएं। यह नुस्खा पुराना बुखार, तिल्ली बढ़ जाना और वात प्रकोपजन्य व्याधियों को दूर करता है। इसे लाभ होने तक सेवन करना चाहिए।
पिप्पल्यादि चूर्ण : पिप्पली, नागरमोथा, काकड़ासिंगी, अतीस, चारों द्रव्य 50-50 ग्राम लेकर, कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। इस चूर्ण को सुबह-शाम चने बराबर मात्रा में थोड़े से शहद में मिलाकर चाट लेना चाहिए। इस प्रयोग से, बच्चों को ज्वर, अतिसार, पेचिश, वमन, सर्दी-जुकाम और खांसी आदि व्याधियों से छुटकारा मिलता है। यह बच्चों के लिए एक सौम्य और निरापद औषधि है अतः निर्भयतापूर्वक बच्चों को दी जा सकती है।
कृष्णादि चूर्ण : पिप्पली, पद्माख, लाख और छोटी कटेली, सब 50-50 ग्राम लेकर कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर कपड़े से छान लें। इस चूर्ण को आधा-आधा चम्मच, शहद में मिलाकर सुबह-शाम लेना चाहिए। कफ, कास, ज्वर और उरःक्षत, कफ के साथ रक्त जाना, कफ पीले रंग का और दुर्गन्धयुक्त कफ निकलना आदि व्यधियों को शीघ्र दूर करने वाली औषधि है।

64 प्रहरी पिप्पली : पिप्पली को अच्छा साफ करके कूट-पीसकर महीन चूर्ण करें और उसे कपड़े से छान लें। इस चूर्ण को 64 प्रहर तक खरल में घोंटने पर 64 प्रहरी पीपर तैयार होती है। इसकी मात्रा 2 से 4 रत्ती है और इसे दिन में दो बार शहद में मिलाकर लेते हैं। इसके सेवन से शरीर में सतत्‌ ऊर्जा का संचार होता है। यह पाचन संस्थान को शक्तिशाली बनाती है और कफ का नाश करती है। यह पुराने बुखार, श्वास, कास, वात प्रकोप और भूख कम होना आदि व्याधियों को दूर करने वाली उत्तम औषधि है। यह बनी-बनाई बाजार में इसी नाम से मिलती है।
पाचक पिप्पली : नीबू के रस में पीपर डालकर भिगो दें और थोड़ा सा पिसा सेंधा नमक डालकर इसे 7 दिन तक रखें। आठवें दिन पीपर निकालकर सुखा लें। सुबह शाम 2-2 पीपर कूटकर खाने से अपच, अरुचि, कब्ज और मन्दाग्नि दूर होती है तथा खाया-पिया ठीक तरह से हजम हो जाता है।

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