इरम हबीब : पत्थरबाजों के बीच कश्मीर की कली मुस्कुराई, पहली मुस्लिम महिला जो उड़ाएगी विमान...

इन दिनों जबकि से युवाओं की बस एक ही तस्वीर आ रही है। वह है हाथों में पत्थर, मुंह पर कपड़ा, अजीब से नारे, आर्मी और पुलिस के लिए गालियां... ऐसे डरावने मंजर से कोई एक खबर ऐसी आती है कि लगता है कश्मीर की केसर क्यारियां फिर मुस्कुराने वाली है। कश्मीर की एक नाजुक कली ने इन विपरीत हालातों में अपने सपनों को नई उड़ान दी है।


जम्मू-कश्मीर की ही वह कली है कश्मीर की जो इस राज्य की पहली मुस्लिम महिला पायलट बनी हैं और गो एयर जॉइन करने वाली हैं।

लेकिन कठोर हालातों में खुद को साबित करना या कुछ अलग राह चुनना कभी आसान नहीं होता, और इरम के लिए भी नहीं था। जिन वादियों में चलने वाली ठंडी हवाएं भी युवाओं में नफरत और विद्रोह की आग में झुलसा रही हों, वहां सुहाने सपनों की बयार को थाम लेना और तब तक थामे रखना जब तक वह पूरा न हो जाए... मुश्किल है।
यहां जिक्र करना जरूरी है कि इससे पहले भी कश्मीरी पंडि‍त समुदाय से आने वाली तन्वी रैना ने यही बात साबित की थी साल 2016 में। जब वे घाटी की पहली महिला पायलट बनी थीं और उन्होंने एयर इंडि‍या जॉइन किया था। इसके अलावा भी पिछले तीन साल में 50 और कश्‍मीरी महिलाएं कई घरेलू और इंटरनेशनल एयरलाइन में चालक दल में शामिल हुई हैं, जो यह बताता है कि कश्मीर की हवाओं का रुख बदल रहा है।
इरम परंपरावादी कश्‍मीरी मुस्लि‍म समुदाय से आती हैं और उनके पिता कश्मीर के ही सरकारी अस्पतालों में सर्जिकल सामान की आपूर्ति करते हैं। वे बचपन से ही पायलट बनने का सपना लेकर पली-बढ़ीं। देहरादून से वानिकी विषय में स्नातक करने के बाद इरम ने शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ती रहीं।

साल 2016 में इरम ने अमेरिका के एक फ्लाइट स्‍कूल से प्रशिक्षण लिया और अमेरिका में 260 घंटे विमान उड़ाने का अनुभव हासिल किया। उन्‍हें अमेरिका और कनाडा में व्‍यावसायिक विमान उड़ाने का लाइसेंस भी मिल गया है।

इरम का कहना है - 'सबको यह जानकर आश्‍चर्य हुआ कि मैं कश्‍मीरी मुस्लिम हूं और विमान उड़ा रही हूं, लेकिन मैंने अपने लक्ष्‍य को पाने के लिए आगे बढ़ना जारी रखा।'
इरम इस समय दिल्‍ली में हैं और व्‍यावसायिक पायलट बनने के लिए क्लास ले रही हैं।

लेकिन इरम और इनकी तरह भविष्य संवारने वाला हर युवा कश्मीर के लिए आदर्श है, बदलते कश्मीर की तस् वीर है... जिससे कश्मीरी युवाओं को सीख लेने की जरूरत है। उन्हें समझना होगा, कि पत्थरों की जगह जमीन के नीचे होती है लेकिन ख्वाबों की जगह हमेशा आसमान में होती है।


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