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हमने किस रात नाला सर न किया पर उसे आह ने असर न किया
सबके हाँ तुम हुए करम फ़रमा इस तरफ़ को कभी गुज़र न किया
क्यूँ भवें तानते हो बन्दानवाज़ सीना किस वक़्त में सिपर न किया
कितने बन्दों को जान से खोया कुछ ख़ुदा का भी तूने डर न किया
देखने को रहे तरसते हम न किया रहम तूने पर न किया
आप से हम गुज़र गए कब के क्या है ज़ाहिर में गो सफ़र न किया
कौन सा दिल है वो के जिस में आह ख़ाना आबाद तूने घर न किया
तुझसे ज़ालिम के सामने आया जान का मैंने कुछ ख़तर न किया
सबके जोहर नज़र में आए दर्द बेहुनर तूने कुछ हुनर न किया।
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