लगभग संशय के स्वरों मेंमुझेख़ामोश करती हुई वह बोली' वह ज़रूर हमारी बातें सुन रहा हैउसके मन में उतरती है एक-एक बातवह बहुत चालाक है'मैंने उसे आश्वस्त कियाउससे कुछ मत छिपाओवह सब जानता है वहाँहोगा प्रविष्ट एक दिनमेरी तरह यह भीऔरत की दुनिया मेंपागल होगाधूप और संगीत के लिएरोज़ एक नई दुनियाबनाता हुआ। यह एक ऐसा कवि है जो एक माँ के लिए कविताएँ लिखते हुए औरत की दुनिया में एक बच्चे के जरिये शामिल होता है। वह जानता है कि सिर्फ औरत ही इस दुनिया को सुंदर और जीने लायक बनाती है। सपने देखने और गीत गाने लायक बनाती है। इस कवि की तरह ही किलकारियाँ भरता वह बच्चा औरत की दुनिया में शामिल होगा, धूप और संगीत के लिए पागल होता हुआ रोज एक नईदुनिया बनाएगा। वह नईदुनिया जहाँ खिलते फूल और मुस्कुराते खिलौने होंगे। हरी पन्नी से दिखाई देती हरी दुनिया होगी, हरा आसमान होगा और गुलाबी पन्नी लगाकर दिखाई देती गुलाबी दुनिया होगी। जाहिर है,यह दुनिया को देखने का एक भोला और निर्दोष तरीका है और इसमें वह गहरी इच्छा भी शामिल है कि दुनिया को इसी तरह से सुंदर होना चाहिए। ये हैं समकालीन हिंदी कविता के महत्वपूर्ण कवि नरेंद्र जैन जिन्होंने एक बच्चे तीता के लिए कविताएँ लिखीं और इसी शीर्षक से उनका संग्रह भी प्रकाशित हुआ था। इसीलिए वे इस खास बातचीत में कहते हैं कि यदि मुझे बुद्धिजीवियों और बच्चों में किसी एक के साथ रहना चुनना पड़े तो मैं बच्चों के साथ रहना पसंद करूँगा। मैं जुनून की हद तक उनकी दुनिया में रहता हूँ और मुझे लगता है कि मैं बच्चों पर कविताएँ लिखते हुए ही दुनिया-जहान के बारे में लिखता हूँ। कहने की जरूरत नहीं कि बच्चे हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा हैं। श्री जैन अपने एकल काव्यपाठ के सिलसिले में इंदौर आए थे। वे मानते हैं कि इस भयावह समय में हमें करूणा ही बचा सकती है। और यह करूणा स्त्रियों और बच्चों में अविरल-अकुंठित बहती रहती है और इसीलिए मैं इनके जरिये करूणा को कविता में अभिव्यक्त करता हूँ। हमारे समय के कई बड़े कवियों ने करूणा को ही तमाम अत्याचार के खिलाफ प्रतिरोध की ताकत में बदला है। आप स्त्रियों और बच्चों पर कविता लिखते हुए भी बड़ी राजनीतिक कविताएँ लिख सकते हैं। इस पर लिखी गई कविताओं में बहती करूणा गहरी और सूझबूझ भरी राजनीतिक टिप्पणियाँ होती हैं। |