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लेखन से समझौता नहीं: मालती जोशी
लेखिका ज्योति जैन की आत्मीय बातचीत
ज्योति जैन, लेखिका मालती जोशी के साथ
Ravindra SethiaWD
जिनकी 'सात कहानियों' पर श्रीमती जया बच्चन द्वारा 'सात फेरे' का निर्माण हो चुका है। गुलजार साहब के टीवी सीरियल 'किरदार' व 'भावना' में जिनकी कहानियाँ शामिल हो चुकी हैं। 40 से अधिक जिनके कथा संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ऐसे अनेक अलंकरणों से विभूषित सुप्रसिद्ध कहानीकार श्रीमती मालती जोशी के इंदौर आगमन पर उनसे रूबरू होते हुए चंद संवाद लेखिका ज्योति जैके -

* सर्वप्रथम तो मायके (इंदौर) में आपका स्वागत। 4 जून को आप 75 वर्ष पूर्ण करने जा रही हैं। आपको बधाई। आप स्वस्थ रहते हुए शतायु हों, ऐसी शुभकामनाएँ और सबसे पहले आपसे यही पूछती हूँ कि जबसे आपने लेखन प्रारंभ किया, तबसे अब तक के दौर में लेखन में आप क्या परिवर्तन महसूस करती हैं?

- पहले काल्पनिक भाषा थी, अब यथार्थ के धरातल पर लेखन अधिक है, जो कभी-कभी जुगुप्सा पैदा करता है। पहले लेखन इतना खुला भी नहीं होता था। अब लगता है खुलेपन से कोई परहेज नहीं। स्त्री मुक्ति के नाम पर कितना ही उघड़ जाओ, यही शायद आज लोग पसंद करते हैं। यथार्थ के नाम पर लेखन अब आम हो गया है, जो कुछ दशक पहले नहीं था।

* अभी तक आपको जितना भी पढ़ा, उपन्यास कम, कहानियाँ अधिक हैं। कहानी की ओर रुझान की कोई खास वजह?
- मुझे लगता है जो भी मुझे कहना है, वह मैं जल्दी से कह सकती हूँ, उपन्यास का ताना-बाना लंबा होता है। उसे अंतिम छोर तक बाँधकर ले जाना पेशंस का काम है, इसीलिए मुझे कहानी लेखन अधिक भाया।

* आपकी करीब-करीब सारी कहानियों में मध्यम, निम्न मध्यम वर्ग की पृष्ठभूमि ज्यादा नजर आती है, फिर चाहे वह 'तौलिये' हो या 'मेहमान' अथवा पूजा के फूल
- मध्यम वर्ग व बड़े परिवार की हूँ। अत: उसी के इर्द-गिर्द ही कहानियाँ घूमती हैं। जाहिर सी बात है कि जिस परिवेश में आप रहे हो, या रहते हो, वही आपके लेखन में अधिक रहता है। मध्यमवर्गीय परिवार से थी, इसलिए कहानी में सहज ही चित्रण हो जाता है।
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