हालाँकि सुदर्शन बचपन के बदले जवानी भी लुटाने को तैयार थे, लेकिन जवानी की रूमानियतों को भी उन्होंने सभी जवां दिलों को शिद्दत से महसूस कराई। लिखा हुआ था जिस किताब में कि इश्क तो हराम है हुई वहीं किताब गुम, बड़ी हसीन रात थी।
अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें हम उनके लिए जिंदगानी लुटा दें।
प्यार की वफा और शिकायतों को बड़ी संजीदगी से पेश किया।
हमसे पूछो न दोस्ती का सिला दुश्मनों का दिल भी हिला देगा।
दूसरी और निगाहें पेंच से घायल होने के बाद सुदर्शन को इस बात की दुविधा भी है कि उनके हक में फैसला हो भी या नहीं। मेरा कातिल ही मेरा मुंसिब है क्या मेरे हक में फैसला देगा।
दुनियादारी से अपने को जोड़ते और अलग करते हुए उन्होंने लिखा है :
लोग कहते हैं कि वक्त चलता है और इंसान भी बदलता है काश रुक जाए वक्त आज की रात और कोई बदले न आज के बाद
वक्त बदले ये दिल ना बदलेगा तुम से रिश्ता कभी ना टूटेगा।
उनका यह दूसरा शेर भी प्यार में दोहरेपन की पड़ताल करता है : लोग बोते हैं प्यार के सपने और सपने बिखर भी जाते हैं एक एहसास ही तो है सो वफा और एहसास मर भी जाते हैं
लेकिन तमान ऊँचे-नीचे समाज और स्वभाव को देखने के बाद भी फाकिर कभी नाउम्मीद नहीं थे : हर एक मोड़ पर हम जिंदगी को सज्दा दें चलो जिंदगी को मुहब्बत बना दें।
सुदर्शन हमारे बीच से कूच कर गए, लेकिन सभी को खुश रहने का, हँसते और खिलखिलाते रहने का संदेश दे गए - फिर आज मुझे तुमको बस इतना बताना है, हँसना ही जीवन है, हँसते ही जाना है। (सुदर्शन फाकिर की तस्वीर यूनुस खान के ब्लॉग रेडियोवाणी से साभार)
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