दुनिया के सबसे हरे भरे शहर

पुनः संशोधित मंगलवार, 13 मार्च 2018 (12:31 IST)
दुनिया भर के शहर कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिए कदम बढ़ा रहे हैं। यहां देखिए उन शहरों को जिन्हें इस काम में बड़ी कामयाबी मिली है।
कोपेनहेगन, डेनमार्क
कोपेनहेगेन दुनिया की पहली कार्बन न्यूट्रल राजधानी बनना चाहता है और वो भी 2025 तक। 1995 से अब तक यहां कार्बन उत्सर्जन को घटा कर आधा कर लिया गया है। यहां के बड़े हिस्से को कार फ्री जोन घोषित किया गया है और उच्च स्तर के सार्वजनिक परिवहन के साथ ही यहां साइकिल चलाने की भी बेहतरीन सुविधा है। इतना ही नहीं, गर्म और ठंडे पानी के लिए भी यहां उन्नत तकनीक इस्तेमाल हो रही है जिससे उत्सर्जन काफी घटा है।
रेक्याविक, आइसलैंड
आइसलैंड की राजधानी में पहले से ही हीटिंग और बिजली की रिन्यूएबल सप्लाइ है। मुख्य रूप से हाइड्रोपावर और जियोथर्मनल पावर के जरिए। यहां के 95 फीसदी घर शहर के हीटिंग नेटवर्क से जुड़े हैं। शहर 2040 तक सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह से जीवाश्म ईंधन से भी मुक्त करने की तैयारी में है। बिना कार के रहने वाले निवासियों को भी खूब प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

क्यूरीतिबा, ब्राजील
ब्राजील के आठवें बड़े शहर में 60 फीसदी से ज्यादा आबादी शहरी बस नेटवर्क से चलती है। यहां करीब 250 किलोमीटर की बाइक लेन भी है और साथ ही देश की पहली बड़ी सिर्फ पैदल यात्रियों की सड़क रुआ दास फ्लोरेस। क्यूरितिबा की ग्रीन बेल्ट बाढ़ जैसी आपदाओं से प्राकृतिक बचाव देती है। हालांकि इसकी बढ़ती आबादी इसके लक्ष्यों पर दबाव बढ़ा रही है।
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका
2016 में सैन फ्रांसिस्को ने कानून पास किया कि सभी नई इमारतों को छत पर फोटोवोल्टेइक सिस्टम लगाना होगा। अमेरिका में यह पहली बार हुआ। यहां 2007 से ही प्लास्टिक की थैलियों पर रोक है। 2009 से यहां खाने की बर्बादी रोकने का भी कार्यक्रम चल रहा है। अब यह 2020 तक कचरा मुक्त बनने की तैयारी में है साथ ही ज्यादतर बसें और हल्की ट्रेनें भी कार्बन उत्सर्जन से मुक्त होंगी।
फ्रैंकफर्ट, जर्मनी
जर्मनी की आर्थिक राजधानी दुनिया के उन पहले शहरों में है जिन्होंने 2050 तक सौ फीसदी रिन्यूएबल एनर्जी सप्लाई के लक्ष्य को स्वीकार किया है। सभी नई इमारतों को ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल के नियमों का पालन करना होता है। पीवीसी जैसी विवादित चीजों पर रोक है और इसने बड़े पैमाने पर अपने कचरे में कमी की है। फ्रैकफर्ट की ई मोबिलिटी की दिशा में भी बड़ी योजना बनाई गई है।
वैंकूवर, कनाडा
वैंकूवर 2020 तक दुनिया का पहला ग्रीनेस्ट सिटी बनने की कोशिश कर रहा है। वह 2007 की तुलना में कार्बन उत्सर्जन को 33 फीसदी घटाना चाहता है। शहर के लिए बिजली पूरी तरह से पनबिजली वाले बांध से आती है हालांकि अब भी यहां घरों को गर्म करने और परिवहन में प्राकृतिक गैस और तेल से दूर होने की जरूरत है।

किगाली, रवांडा
किगाली को अफ्रीका का सबसे साफ शहर कहा जाता है। इसने पैदल यात्रियों और साइकिल चलाने वालों के लिए अलग कॉरिडोर की योजना बनाई है। प्लास्टिक बैग पर रोक है और नागरिक हर महीने में एक दिन शहर को साफ करने में निकल जाते हैं। यहां कूड़ा एक दुर्लभ चीज है। हालांकि मानवाधिकार संगठन कहते हैं कि समाज इस साफ सफाई की भारी कीमत चुका रहा है।
ल्युबलियाना, स्लोवेनिया
यूरोपीय ग्रीन कैपिटल 2016 को जरूरत की सारी बिजली पबबिजली से मिलती है। इसका ध्यान पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पैदल मार्ग और साइकिल नेटवर्क पर है और इसने सिटी सेंटर में कारों को जाने पर रोक लगा रखी है। यह पहला यूरोपीय शहर जिसने जीरो वेस्ट का लक्ष्य बनाया और यहां 60 फीसदी से ज्यादा कचरे को रिसाइकल करता है जो यूरोप में सबसे ज्यादा है।

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