Widgets Magazine

ईदुज्जौहा का महत्व जानिए...


 
 
* में कुर्बानी से है ईदे-अजहा का गहरा संबंध... 
 
ईदे-अजहा के दिन आमतौर से बकरे की कुर्बानी की जाती है। इस्लाम मजहब में दो ईदें के रूप में मनाई जाती हैं। ईदुलब फित्र जिसे मीठी भी कहा जाता है और दूसरी ईद है ईद। इस ईद को आम आदमी बकरा ईद भी कहता है। शायद इसलिए कि इस ईद पर बकरे की कुर्बानी की जाती है। वैसे इस ईद को ईदुज्जौहा औए ईदे-अजहा भी कहा जाता है। इस ईद का गहरा संबंध कुर्बानी से है।
 
को खुदा की तरफ से हुक्म हुआ कि कुर्बानी करो, अपनी सबसे ज्यादा प्यारी चीज की कुर्बानी करो। हजरत इब्राहीम के लिए सबसे प्यारी चीज थी उनका इकलौता बेटा इस्माईल। ‍लिहाजा हजरत इब्राहीम अपने बेटे को कुर्बानी करने के लिए तैयार हो गए। इधर बेटा इस्माईल भी खुशी-खुशी अल्लाह की राह में कुर्बान होने को तैयार हो गया।
 
मुख्तसर ये कि ऐन कुर्बानी के वक्त हजरत इस्माईल की जगह एक दुम्बा क़ुर्बान हो गया। खुदा ने हजरत इस्माईल को बचा लिया और हजरत इब्राहीम की कुर्बानी कुबूल कर ली। तभी से हर साल उसी दिन उस कुर्बानी की याद में बकर ईद मनाई जाती है और कुर्बानी की जाती है।
 
इस दिन आमतौर से बकरे की कुर्बानी की जाती है। बकरा तन्दुरुस्त और बगैर किसी ऐब का होना चाहिए। यानी उसके बदन के सारे हिस्से वैसे ही होना चाहिए जैसे खुदा ने बनाए हैं। सींग, दुम, पांव, आंख, कान वगैरा सब ठीक हों, पूरे हों और जानवर में किसी तरह की बीमारी भी न हो। कुर्बानी के जानवर की उम्र कम से कम एक साल हो।
 
अपना मजहबी फरीजा समझकर कुर्बानी करना चाहिए। जो जरूरी बातें ऊपर बताई गई हैं उनका ख्याल रखना चाहिए। लेकिन आजकल देखने में आ रहा है कि इसमें झूठी शान और दिखावा भी शामिल हो गया है। 15-20 हजार से लेकर लाख, दो लाख का बकरा खरीदा जाता है, उसे समाज में घुमाया जाता है ता‍कि लोग उसे देखें और उसके मालिक की तारीफ करें।
 
इस दिखावे का कुर्बानी से कोई तआल्लुक नहीं है। कुर्बानी से जो सवाब एक मामूली बकरे की कुर्बानी से मिलता है वही किसी महंगे बकरे की कुर्बानी से मिलता है। अगर आप बहुत पैसे वाले हैं तो ऐसे काम करें जिससे गरीबों को ज्यादा फायदा हो।
 
अल्लाह का नाम लेकर जानवर को क़ुर्बान किया जाता है। इसी कुर्बानी और गोश्त को हलाल कहा जाता है। इस गोश्त के तीन बराबर हिस्से किए जाते हैं, एक हिस्सा खुद के लिए, एक दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा गरीबों और मिस्कीनों के लिए। मीठी ईद पर सद्का और जकात दी जाती है तो इस ईद पर कुर्बानी के गोश्त का एक हिस्सा गरीबों में तकसीम किया जाता है।  >
 
इस तरह यह ईद जहां सबको साथ लेकर चलने का पैगाम देती है। वहीं यह भी बताती है के इंसान को खुदा का कहा मानने में, सच्चाई की राह में अपना सब कुछ कुर्बान करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। हर त्योहार पर गरीबों का ख्याल जरूर रखा जाता है ताक‍ि उनमें कमतरी का एहसास पैदा न हो।

Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :

बृहस्पतिवार को करें मंगल दोष के ये उपाय, दूर होगा तनाव...

बृहस्पतिवार को करें मंगल दोष के ये उपाय, दूर होगा तनाव...
ज्यादातर ज्योति‍षी का मानना है कि अगर कुंडली में मंगल कमजोर हो तो गुरुवार का दिन प्रतिकूल ...

मंदबुद्धि छात्रों के लिए बहुत लाभदायी है यह एक मंत्र, अवश्य ...

मंदबुद्धि छात्रों के लिए बहुत लाभदायी है यह एक मंत्र, अवश्य पढ़ें...
विद्यार्थी को इस मंत्र को प्रत्येक दिन नहा-धोकर पवित्र आसन पर बैठकर धूप दीप जलाकर ...

नहीं रखने चाहिए बच्चों के ये नाम, वर्ना पछताएंगे

नहीं रखने चाहिए बच्चों के ये नाम, वर्ना पछताएंगे
हिंदुओं में वर्तमान में यह प्रचलन बढ़ने लगा है कि वे अपने बच्चों के नाम कुछ हटकर रखने लगे ...

शुक्र का स्वराशि वृषभ में प्रवेश, क्या होगा 12 राशियों पर ...

शुक्र का स्वराशि वृषभ में प्रवेश, क्या होगा 12 राशियों पर असर...
शुक्र ने अपनी स्वराशि वृषभ में प्रवेश कर लिया है। शुक्र को सौंदर्य, भोग-विलास, ...

सोना-चांदी शुभ क्यों होते हैं पूजा में...

सोना-चांदी शुभ क्यों होते हैं पूजा में...
चांदी को भी पवित्र धातु माना गया है। सोना-चांदी आदि धातुएं केवल जल अभिषेक से ही शुद्ध हो ...

बांग्लादेश में हैं माता के ये 5 शक्तिपीठ

बांग्लादेश में हैं माता के ये 5 शक्तिपीठ
भारत का बंटवारा जब हुआ था तब भारतीय हिन्दुओं ने अपने कई तीर्थ स्थल, शक्तिपीठ और प्राचीन ...

अतिथि देवो भव:, जानिए अतिथि को देवता क्यों मानते हैं?

अतिथि देवो भव:, जानिए अतिथि को देवता क्यों मानते हैं?
अतिथि कौन? वेदों में कहा गया है कि अतिथि देवो भव: अर्थात अतिथि देवतास्वरूप होता है। अतिथि ...

यह रोग हो सकता है आपको, जानिए 12 राशि अनुसार

यह रोग हो सकता है आपको, जानिए 12 राशि अनुसार
12 राशियां स्वभावत: जिन-जिन रोगों को उत्पन्न करती हैं, वे इस प्रकार हैं-

वेदों के ज्ञाता श्री रामानुजाचार्यजी का जीवन परिचय

वेदों के ज्ञाता श्री रामानुजाचार्यजी का जीवन परिचय
श्री रामानुजाचार्य का जन्म सन् 1017 में श्री पेरामबुदुर (तमिलनाडु) के एक ब्राह्मण परिवार ...

मांग में सिंदूर क्यों सजाती हैं विवाहिता?

मांग में सिंदूर क्यों सजाती हैं विवाहिता?
मांग में सिंदूर सजाना एक वैवाहिक संस्कार है। सौभाग्यवती स्त्रियां मांग में जिस स्थान पर ...

राशिफल