निजामों का शहर - हैदराबाद

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खूबसूरत इमारतों, निजामी शानो-शौकत और लजीज खाने के कारण मशहूर के मानचित्र पर एक प्रमुख के रूप में अपनी एक अलग अहमियत रखता है। इस शहर को विविध संस्कृतियों के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। निजामों के इस शहर में आज भी हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द्र से एक-दूसरे के साथ रहकर उनकी खुशियों में शरीक होते हैं।

हैदराबाद और दो जुड़वाँ शहरों के नाम से जाने जाते हैं। इन दोनों शहरों को विभाजित करने वाली झील 'हुसैन सागर झील' है, जो अपनी नायाब खूबसूरती के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। आंध्रप्रदेश की राजधानी हैदराबाद वर्तमान में सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी के केंद्र के रूप में अपनी एक नई पहचान बना चुका है।

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अपने लजीज मुगलई भोजन के साथ-साथ हैदराबाद निजामी तहजीब के कारण भी दुनिया भर में मशहूर है। स्वादप्रेमियों के लिए तो हैदराबाद जन्नत के समान है। यहाँ की लजीज बिरयानी और पाया की खूशबू दूर-दूर से पर्यटकों को हैदराबाद खींच लाती है। इस पर हैदराबाद के नवाबी आदर-सत्कार व खान-पान को देखकर आपको भी लगेगा कि वाकई में आप किसी निजाम के शहर में आ गए हैं।

हैदराबाद के मुख्य आकर्षण :- ‍निजामी ठाठ-बाट के इस शहर का मुख्य आकर्षण चारमीनार, हुसैन सागर झील, बिड़ला मंदिर, आदि है, जो देश में हैदराबाद को एक अलग पहचान देते हैं।

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:- हैदराबाद की सबसे प्रमुख इमारत 'चारमीनार' के नाम से विख्यात है। इस इमारत में चार मीनारें हैं। शहर के बीचोंबीच बनी इस भव्य इमारत का निर्माण कुली कुतुब शाही नवाब ने कराया था।

यह कहा जाता है कि हैदराबाद में प्लेग जैसी भयानक महामारी पर विजय पाने की खुशी में नवाब ने चारमीनार का निर्माण कराया था। चारमीनार से लगा हुआ ही एक प्रसिद्ध चूड़ी बाजार है, जहाँ आपको अनगिनत वैरायटियों की सुंदर चूडि़याँ देखने को मिल जाएगी।

मक्का मस्जिद :- चारमीनार के दक्षिण-पूर्व में स्थित यह मस्जिद पत्थर की बनी है। निर्माण व स्थापत्य कला के मामले में यह मस्जिद बेजोड़ है।

  अपने लजीज मुगलई भोजन के साथ-साथ हैदराबाद निजामी तहजीब के कारण भी दुनिया भर में मशहूर है। स्वादप्रेमियों के लिए तो हैदराबाद जन्नत के समान है। यहाँ की लजीज बिरयानी और पाया की खूशबू दूर-दूर से पर्यटकों को हैदराबाद खींच लाती है।      
:- ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह सुंदर मंदिर सफेद संगमरमर का बना है। इस पहाड़ी से आप निजामों के इस शहर की भव्यता का सुंदर नजारा देख सकते हैं। शाम के समय इस पहाड़ी से सुंदरता व भव्यता के लिए इस शहर को निहारना पर्यटकों के लिए बहुत ही अच्छा अनुभव होता है।

सालारजंग संग्रहालय :- यह एशिया का सबसे बड़ा संग्रहालय है। यहाँ कई वर्षों पुरानी व बेशकीमती नायाब कलाकृतियों का संग्रह उपलब्ध है।

:- हैदराबाद के प्राणी संग्रहालय की खा‍सियत है इसकी लॉयन सफारी तथा सफेद शेर, इसके अलावा यहाँ आपको अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया के भी कई वन्य प्राणी देखने को मिल जाएँगे। कई एकड़ में फैले इस प्राणी संग्रहालय में आप अपने वाहन से भी घूम सकते हैं।

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:- हैदराबाद शहर को खूबसूरती प्रदान करने वाली यह झील अप्रतिम सुंदरता लिए है। इस झील के बीचोंबीच जिब्राल्टर नामक चट्टान पर गौतम बुद्ध की एक खड़ी प्रतिमा है। इस झील के आसपास सरपट दौड़ती सुंदर सी सड़क है, जिसके चारों और लगी बत्तियाँ एक नेकलेस के समान इस झील की खूबसूरती को बढ़ाती है शायद इसीलिए इस सड़क को 'नेकलेस रोड' के नाम से भी जाना जाता है।

इतिहास :- हैदराबाद को नवाबों का शहर कहा जाता है। इसकी स्थापना सन् 1511 में नवाब कुली कुतुबशाह ने की थी। प्लेग जैसी महामारी से उस वक्त शहर को बचाने के लिए तथा ईश्वर के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए नवाब ने शहर के बीचोंबीच चारमीनार का निर्माण करवाया।

इस खूबसूरत शहर के नामकरण की कहानी भी बड़ी रोचक है। कहा जाता है कि हैदराबाद की नींव बसाते समय यहाँ के नवाब को भागमती नाम की एक बंजारा लड़की से प्रेम हो गया था। भागमती से नवाब की शादी के बाद नवाब ने इस शहर का नाम 'भाग्यनगर' रखा। उस वक्त के तत्कालीन चलन के अनुरूप इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेने के बाद भागमती का नाम हैदरमहल रखा गया। हैदर महल के नाम पर ही इस शहर का नाम भी 'हैदराबाद' रखा गया।

सन् 1687 में औरंगजेब हैदराबाद का शासक बना। उसके बाद सन् 1724 में आसफजाह प्रथम, जिसे कि नवाबों ने 'निजाम-ए-मुल्क' का खिताब दिया था, ने हैदराबाद पर शासन किया। आगे चलकर इन्हीं के उत्तराधिकारियों ने इस शहर पर शासन किया, जो 'निजाम' कहलाए। इन सात निजामों ने हैदराबाद के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया।

कैसे और कब जाएँ हैदराबाद :-
वैसे तो आप वर्षभर में कभी भी हैदराबाद जा सकते हैं परंतु यदि आप यहाँ की झुलसाती गर्मी से बचना चाहते हैं तो अप्रैल-मई माह छोड़कर कभी भी हैदराबाद जा सकते हैं।
हवाईअड्डा :- शमशाबाद हवाईअड्डा
गायत्री शर्मा|
रेलवे स्टेशन :- दक्षिण-पश्चिम रेलवे का मुख्यालय- सिंकदराबाद, नामपल्ली, काचीगुड़ा रेलवे स्टेशन


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