हिन्दी पर देश-विदेश के 20 महापुरुषों के विचार

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हिन्दी हम सबकी भाषा है। जन-जन की भाषा है। हिन्दी के लिए देश-विदेश के बड़े-बड़े विद्वानों ने समय-समय पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। आइए जानते हैं क्या कहते हैं ..... 
 
हिन्दी संस्कृत की बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है। - ग्रियर्सन
 
संस्कृत मां, हिन्दी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है। - डॉ. फादर कामिल बुल्के
 
जीवन के छोटे से छोटे क्षेत्र में हिन्दी अपना दायित्व निभाने में समर्थ है। - पुरुषोत्तमदास टंडन
 
हिन्दी भाषा और हिन्दी को सर्वांगसुंदर बनाना हमारा कर्त्तव्य है। - डॉ. राजेंद्रप्रसाद
 
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। - भारतेंदु हरिश्चंद्र
 
भाषा के उत्थान में एक भाषा का होना आवश्यक है। इसलिए हिन्दी सबकी साझा भाषा है। - पं. कृ. रंगनाथ पिल्लयार
 
मैं मानती हूं कि हिन्दी प्रचार से राष्ट्र का ऐक्य जितना बढ़ सकता है वैसा बहुत कम चीजों से बढ़ सकेगा। - लीलावती मुंशी
 
हिन्दी उर्दू के नाम को दूर कीजिए एक भाषा बनाइए। सबको इसके लिए तैयार कीजिए। - देवी प्रसाद गुप्त
 
राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार
 
हिन्दी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्रनिर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना
 
समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। - (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर
 
हिन्दी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी
 
राष्ट्रभाषा हिन्दी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है। - अनंत गोपाल शेवड़े
 
दक्षिण की हिन्दी विरोधी नीति वास्तव में दक्षिण की नहीं, बल्कि कुछ अंग्रेजी भक्तों की नीति है। - के.सी. सारंगमठ
 
हिन्दी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है। - वी. कृष्णस्वामी अय्यर
 
राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिन्दी ही जोड़ सकती है। - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' 
 
विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वॉल्टर चेनिंग
 
हिन्दी को तुरंत शिक्षा का माध्यम बनाइए। - बेरिस कल्येव
 
संस्कृत की विरासत हिन्दी को तो जन्म से ही मिली है। - राहुल सांकृत्यायन
 
हिन्दी हमारे देश और भाषा की प्रभावशाली विरासत है। - माखनलाल चतुर्वेदी

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