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लेसिक लेजर सर्जरी : जानें संभावित नुकसान एवं सावधानियां...


डॉ. संजय गोकुलदास
आंखों की सामान्य समस्याओं जैसे पास एवं दूर की नजर, चश्मा एवं लगाने में परेशानी होने पर सर्जरी का प्रयोग आपके दृष्टि दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है। वैसे तो यह तकनीक सुरक्षित एवं असरकार है, लेकिन इससे जुड़े संभावित नुकसान को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। जानें संभावित नुकसान एवं सावधानियां -
1 कम या ज्यादा नंबर निकालना - गोकुलदास अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय गोकुलदास के अनुसार, हम किसी मरीज का कम करेक्शन करते हैं, ताकि मरीज को माइनस नंबर की आदत के अनुसार ढाला जा सके। यह मरीज के लिए ज्यादा आरामदेह होता है। मायोपिया होने पर मरीज का कम नंबर निकाला जाता है लेकिन ज्यादा करेक्शन कभी कभार ही किया जाता है।
2 चकाचौंध लगना - रात में प्रकाश की तीव्रता का आभास होता है वहीं दिन में सूर्य प्रकाश की तेज रोशनी का आभास होता है। कभी-कभी सिर भारी भी हो सकता है, लेकिन यह सभी समसएं लेसिक लेजर सर्जरी के बाद कुछ ही दिनों तक होता है, बाद में सब सामान्य हो जाता है।
3 फ्लेप की समस्या - लेकिन प्रक्रिया के दौरान कभी-कभी पुतली के अंदर की फ्लेप में छेद हो जाने के कारण प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती। इसके लिए 3 माह बाद पुन: सर्जरी की जाती है और पुतली के फ्लेप को उसकी सही अवस्था में लाते हैं।
4 कारनियल एक्टेसिया - लेसिक प्रक्रिया के लिए व्यक्ति के पुतली की समह सामान्य होनी चाहिए। कम मोटाई वाली पुतली की अवस्था लेसिक के लिए पर्याप्त नहीं होती, जिसके कारण कारनियल एक्टेसिया हो सकता है। इसकी जानकारी ऑपरेशन से पहले, पेकीमीटरी जांच से लग जाती है, इस स्थिति में ऑपरेशन नहीं किया जाता।
5 अन्य - पुतली में सूजन, फ्लेप का खिसकना, संक्रमण पर्दे का खिसकना, कर्नियल फ्लेप निकल जाना, इपोथोलियल इनग्रोथ आदि अन्य समस्याओं में शामिल हैं। लेकिन इनकी संभावना बहुत ही कम होती है।  

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