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कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

मंगलवार,दिसंबर 8, 2015
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गीत मेरे, देहरी का दीप-सा बन। एक दुनिया है हृदय में, मानता हूं, वह घिरी तम से, इसे भी जानता हूं, छा रहा है किंतु ...
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सीधे सरल शब्दों को कविता के पात्र में डालकर साहित्य रसिकों को 'काव्य रस' चखाने वाले हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. हरिवंश ...
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कविवर डॉ. हरिवंशराय बच्चन का व्यक्तित्व व कृतित्व साकार हो जाता है। बच्चनजी का साहित्य पढ़ने से यह बात स्वतः ही सिद्ध ...
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इलाहाबाद के सिविल लाइंस के 17 क्लाइव रोड वाले भव्य मकान में हालावाद के प्रवर्तक डा. हरिवंश राय बच्चन बतौर किरायेदार ...
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स‍ाहित्‍य में ही यह संभव है कि लोगों के लड़खड़ाते कदमों के लिए जिसे कोसा जाता हो, उसमें भी एकता व धार्मिक सौहार्द की ...
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डॉ. हरिवंशराय बच्चन

शनिवार,जनवरी 12, 2008
'मधुशाला' के रचयिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उनका जन्म 27 नवंबर, 1907 को ...
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अमिताभ ने अपनी स्नातकीय डिग्री के लिए विज्ञान विषय लेकर अपनी मूल प्रवृत्ति को पहचानने में भूल की थी जब परीक्षा-परिणाम ...
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हिन्दी के सुविख्यात कवि डॉ. हरिवंशराय बच्चन को आमतौर पर लोग सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के पिता के अलावा जिस बात के लिए ...
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जब कभी मैं खुद को मुश्किल या हताशा में पाता हूँ। उनकी किसी पुस्तक को पढ़ने लगता हूँ और मुझे एक रास्ता नजर आने लगता ...
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कुछ रचनाकारों के लिए अपनी रचना का सम्मान उतने मायने नहीं रखता, जितना अपनी स्वाभाविकता और पाठकों की पसंद। इसी श्रेणी के ...
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कलकत्ता में एक प्राइवेट कंपनी में छः साल नौकरी करने के बाद उसके मन में यह ख्याल आया कि क्यों न हिंदी फिल्मों में अपनी ...
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बचपन के इक बाबूजी थे

शनिवार,जनवरी 12, 2008
अमिताभ बच्चन के जीवन का पैंसठवाँ वर्ष उनके पिता डॉ. हरिवंशराय बच्चन का जन्मशती वर्ष है। अमिताभ स्वयं युवा पुत्र-पुत्री ...
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बच्चनजी अपनी आत्मकथा का पहला भाग 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' पूरा कर चुके थे और दूसरे भाग 'नीड़ का निर्माण फिर' की योजना ...
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'बादल बन बन आए साकी'

शनिवार,जनवरी 12, 2008
बच्चनजी को मैंने रू-ब-रू देखा 1951 में। सागर में। मैं सागर महाविश्वविद्यालय में बी.ए. अंतिम वर्ष का छात्र था। ...
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जब पहली बार मैंने 43 या 44 में सरस्वती के पुराने अंक पलटते हुए बच्चनजी की प्रसिद्ध कविता 'इस पार प्रिये तुम हो, मधु है, ...
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आ रही रवि की सवारी

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
आ रही रवि की सवारी। नव-किरण का रथ सजा है, कलि-कुसुम से पथ सजा है, बादलों-से अनुचरों ने स्‍वर्ण की
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अग्नि पथ

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हो घने, हो बड़े
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था तुम्हें मैंने रुलाया

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
हा, तुम्हारी मृदुल इच्छा! हाय, मेरी कटु अनिच्छा! था बहुत माँगा ना तुमने किन्तु वह भी दे ना पाया! था तुम्हें मैंने
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मधुशाला का खुमार जारी है

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
सुना है, तुम अपनी कविताओं के जरिये शराब के सेवन का प्रचार करते हो। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने इंदौर में हिंदी ...
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