इंदौर के लिए समय दें शिवराज : सुमित्रा महाजन

सुमित्रा महाजन से जयदीप कर्णिक की बातचीत

WD

पूर्व केन्द्रीय मंत्री और इंदौर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी सुमित्रा महाजन ने वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक से विस्तृत साक्षात्कार में हर मुद्दे पर चर्चा की। आखिर 16वीं लोकसभा के चुनाव क्यों अलग हैं? इस पर महाजन कहती हैं कि अभी तक आमतौर पर संसद में व्यक्ति भेजने के लिए चुनाव होता था, लेकिन इस बार भाजपा के पीएम उम्मीदवारी नरेन्द्र मोदी ताकतवर शख्सियत बनकर उभरे हैं। हालांकि भाजपा अटलजी को सामने रखकर भी पहले चुनाव लड़ चुकी है। वे कहती हैं कि पहले भी मुख्‍यमंत्री प्रोजेक्ट करके चुनाव लड़े जाते रहे हैं। इस संदर्भ में उनका इशारा भाजपा के बुजुर्ग नेता लालकृष्ण आडवाणी की तरफ था। वे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह को निशाने पर लेते हुए कहती हैं कि एक ऐसा प्रधानमंत्री हमें मिलता है जो बोलता ही नहीं है। ऐसा लगता है प्रधानमंत्री कोई है, चला कोई और रहा है। ‍जिस तरह का अंडर करंट आपातकाल के दौरान दिखाई दे रहा है, वही स्थितियां आज भी निर्मित हो रही हैं। चारों ओर परिवर्तन की लहर है।

मोदी की तुलना में भाजपा के पिछड़ने के सवाल पर सुमित्रा जी कहती हैं कि आखिर नरेन्द्र मोदी भी तो भाजपा का ही चेहरा हैं। हालांकि केन्द्र सरकार के खिलाफ नकारात्मक माहौल के लिए वे उसे ही जिम्मेदार ठहराती हैं। मोदी की प्रशंसा करते हुए वे कहती हैं कि उन्होंने (मोदी ने) गुजरात को सुदृढ़ बनाने की बात सोची और वे गुजरात ऊंचाई पर ले गए। वहां विकास का स्तर आंखों से दिखाई देता है। नर्मदा का जल उन्होंने कच्छ के रण तक पहुंचा दिया।

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जब बात मध्यप्रदेश की आती है, यहां के लोगों के विस्थापन की आती है तो वे कहती हैं कि पहली बात तो नर्मदा का उपयोग हम सही तरीके से नहीं कर पाए, क्योंकि उस समय दस साल तक की सरकार थी। दिग्विजयसिंह जैसे व्यक्ति ने कोई प्रयास नहीं किए। बसाहट को लेकर गुजरात सरकार भी मदद के लिए सतत तैयार थी, मगर इनका संवाद ही नहीं था। यह कहीं ना कहीं कांग्रेस की कमजोरी है कि हम नर्मदा का सही उपयोग नहीं कर पाए।

अब तो दोनों तरफ (मध्यप्रदेश और गुजरात) भाजपा की सरकार है? वे कहती हैं कि उसका असर भी दिख रहा है। नर्मदा के बांध का काम भी जल्दी पूरा हो रहा है, साथ ही साथ नर्मदा को हम दूसरी नदियों में मिला रहे हैं। उसमें तो पर्यावरण को कुछ धोखा नहीं है। नर्मदा-क्षिप्रा का मिलन हो चुका है। आप देखो तो पूरा क्षिप्रा का एरिया पानी से तरबतर हो गया है।

जब बात साबरमती की आई तो महाजन ने कहा कि नर्मदा के जल का उपयोग कर गुजरात ने सूखी पड़ी साबरमती को भर दिया और कच्छ के रण तक पानी की समस्या दूर हो गई। ये सब उन्होंने किया। बड़े बांधों के विरोध पर वे कहती हैं कि जो बांध विरोधी हैं, उनसे कई बार मैंने चर्चा की थी। मैं कहती थी कि या तो एक ऐसा नियम बनाओ कि बड़े बांध होना ही नहीं चाहिए हिन्दुस्तान में, लेकिन फिर भी बनते तो जा रहे हैं। आंदोलनकारी बसाहट की भी बात करते हैं, बड़े बांध का विरोध भी करते हैं। दोनों चीजें तो नहीं हो सकती न। काम अधूरा रह जाता है, हमने मध्यप्रदेश में यह भुगता है। इसस विकास अवरुद्ध होता है।

Author जयदीप कर्णिक|
इंदौर से आठवीं बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहीं श्रीमती अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। यह भी माना जा रहा है यह उनका आखिरी लोकसभचुनाव भी हसकतहैताई चाहती हैं कि प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को इंदौर के लिए और अधिक समय देना चाहिए ताकि सपनों का यह शहर अपनी असली शक्ल अख्तियार कर सके।
जब उनसे पूछा गया कि हमारी मेधाजी से भी बात हुई। उनका कहना है कि हम विकास को नहीं रोकते, बल्कि जो बसाहट के दावे किए गए या सिंचाई के माध्यम से हरियाली लाने के दावे किए गए, वे दावे दरअसल सच्चे नहीं हैं? इस पर सुमित्रा जी कहती हैं कि एक बात समझ लो जमीन जितनी है, उतनी ही है। मैं बहुत कठोर सत्य बोल रही हूं आप पृथ्वी को तो बड़ा नहीं कर सकते हैं। मेरी मेधाजी से भी एक ही बार बात हुई। मैंने उनसे कहा कि पहले तो तय करो कि हम क्या चाहते हैं। बसाहट चाहते हैं तो पूरी लड़ाई बसाहट के लिए हो। फिर बड़े बांध का विरोध छोड़ो। उन्होंने मप्र का विकास रोका।

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