ईद-उल-फित्र : मुरादें पूरी होने का दिन

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'ईद-उल-फित्र' दरअसल दो शब्द हैं। 'ईद' और 'फित्र'। असल में 'ईद' के साथ 'फित्र' को जोड़े जाने का एक खास मकसद है। वह मकसद है में जरूरी की गई रुकावटों को खत्म करने का ऐलान। साथ ही छोटे-बड़े, अमीर-गरीब सबकी हो जाना। यह नहीं कि पैसे वालों ने, साधन-संपन्न लोगों ने रंगारंग, तड़क-भड़क के साथ मना लिया व गरीब-गुरबा मुंह देखते रह गए।
शब्द 'फित्र' के मायने चीरने, चाक करने के हैं और ईद-उल-उन तमाम रुकावटों को भी चाक कर देती है, जो रमजान में लगा दी गई थीं। जैसे रमजान में दिन के समय खाना-पीना व अन्य कई बातों से रोक दिया जाता है।

ईद के बाद आप सामान्य दिनों की तरह दिन में खा-पी सकते हैं।

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