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Written By Author अखिल गुप्ता
Last Updated : सोमवार, 28 जून 2021 (16:59 IST)

द्रविड़ को कोच बनने से ऐतराज, वरना भारतीय टीम कर सकती थी हर तरफ राज

द्रविड़ को कोच बनने से ऐतराज, वरना भारतीय टीम कर सकती थी हर तरफ राज - Explainer: Why Rahul Dravid is the best coach
Rahul Dravid

टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में मिली हार के बाद अब टीम इंडिया अपने नए मिशन की ओर आगे बढ़ चुकी है। दो हफ्ते बाद भारतीय टीम का सामना लंकाई चीतों से उन्हीं के गढ़ में होना है। वैसे हमारी सीनियर टीम के अधिकांश खिलाड़ी इस समय इंग्लैंड दौरे पर हैं और श्रीलंका उड़ान भरने वाली टीम ज्यादातर युवा खिलाड़ियों से सजी हुई होगी।

श्रीलंका दौरा पर मैन इन ब्लू की लीडरशिप का जिम्मा गब्बर शिखर धवन के कंधों पर होगा, जबकि कोचिंग की भूमिका में दिग्गज राहुल द्रविड़ नजर आएंगे... अब राहुल द्रविड़ से याद आया, भारतीय टीम का यह लंकाई दौरा युवा खिलाड़ियों के बजाय द्रविड़ की कोचिंग को लेकर ज्यादा चर्चा में बना हुआ है।

अब सभी के चहीते, सबके प्यारे राहुल द्रविड़ टीम इंडिया के हेड कोच के रूप में युवा ब्रिगेड के साथ जा रहे हो, तो बातें तो उनकी होगी ही।

अब तो बना दो इंडिया का कोच



न्यूजीलैंड के खिलाफ डब्ल्यूटीसी फाइनल में भारतीय टीम को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। फाइनल में मिली हार के साथ ही चारों तरफ बस एक ही बात कही जाने लगी कि अब रवि शास्त्री की जगह राहुल द्रविड़ को भारत का कोच बना देना चाहिए। वैसे ये बात सिर्फ टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल से जुड़ी हुई नहीं है।

जी हां, शास्त्री की जगह द्रविड़ को कोच बनाओ, ये बातें क्रिकेट के गलियारों में काफी लंबे समय से सुनने को मिल रही है। आलम तो यहां तक है कि, किसी सीरीज में भारत की हार के तुरंत बाद ट्विटर पर तुरंत #RahulDravidNewCoach या फिर #DravidShouldReplaceShastri ट्रेंड करने लगता है।

बतौर कोच गाड़ चुके हैं झंडे पर झंडे

वैसे देखा जाए तो राहुल द्रविड़ के लिए फैंस की यह मांग जायज भी है। ‘द वॉल’ द्रविड़ जितने महान खिलाड़ी रहे, उतना ही नाम उन्होंने बतौर कोच के रूप में भी कमाया। इंडिया ए और अंडर-19 टीमों ने द्रविड़ की कोचिंग की लगातार सफलता के झंडे गाड़े।

जानकारी के लिए बता दें कि, साल 2016 और 2019 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया था और दोनों बार टीम के कोच राहुल द्रविड़ थे। 2016 में ईशान किशन की कप्तानी में भारत रनर-अप रहा था, जबकि 2019 में पृथ्वी शॉ की अगुवाई में चैंपियन बनकर सामने आया था।

बतौर खिलाड़ी द्रविड़ ने एक नहीं, दो नहीं, बल्कि पूरे तीन एकदिवसीय विश्व कप खेले लेकिन एक बार भी वर्ल्ड कप का खिताब नहीं जीत सके। मगर 2019 में आखिरकार बतौर कोच उनका अपने हाथों में वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाने का सपना पूरा हुआ।



बतौर कोच अंडर-19 वर्ल्ड कप में प्रदर्शन :
साल प्रदर्शन
2016 रनर-अप
2019 चैंपियन
 
क्या अब बना देना चाहिए कोच

साल 2017 के चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के हाथों मिली हार के बाद अनिल कुंबले ने टीम इंडिया के हेड कोच के पद से इस्तीफा दे दिया था और तब ये अटकलें काफी जोरों पर थे, कि अब तो द्रविड़ को सीनियर टीम की कोचिंग का जिम्मा अपने हाथों में लेना चाहिए, लेकिन उन्होंने इस पद के लिए अपना नामांकन नहीं भरा।

2019 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में मिली हार के बाद तो कोच शास्त्री को कटघरे में खड़ा कर दिया गया था और हर जगह बस एक ही बात सुनने को मिल रही थी कि अब तो राहुल द्रविड़ को कोच बनाना ही होगा। सिर्फ क्रिकेट फैंस नहीं, बल्कि कई पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट पंडितों ने भी एक सुर में कहा था, ‘अबकी बार द्रविड़ की सरकार’...

लेकिन द्रविड़ फिर पीछे हर गए और इस बार उन्होंने बयान देते हुए कहा कि, मैं युवा खिलाड़ियों के साथ काम करना चाहता हूं, ताकि उनको राष्ट्रीय टीम और उनके करियर में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार कर सकूँ।

द्रविड़ के इतना कह देने के साथ ही उनके टीम इंडिया के हेड कोच बन की बात बंद हो गई और एक बार फिर से रवि शास्त्री को भारत की सीनियर टीम का कोच नियुक्त कर दिया गया।

खिलाड़ी भी करते हैं तारीफ



राहुल द्रविड़ ने आपनी कोचिंग में कई प्रतिभाओं को निखारा। संजू सैमसन, ऋषभ पंत, शुभम गिल, पृथ्वी शॉ, ईशान किशन आदि कई सारे युवा खिलाड़ी भारतीय टीम को द्रविड़ की ही देन हैं। इन सभी खिलाड़ियों को जब मौका मिलता है, तो वह द्रविड़ का गुणगान करते नहीं थकते।

अब जबकि द्रविड़ राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में प्रमुख हैं तब वह अगली पी​ढ़ी के क्रिकेटरों को तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। राहुल द्रविड़ ने अंडर 19 क्रिकेट टीम की कोचिंग कर भारतीय क्रिकेट के भविष्य को मजबूत किया है। आज जिस बेंच स्ट्रेंथ की दुनियाभर में चर्चा होती है, उसका श्रेय राहुल द्रविड़ को ही जाता है।