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Last Updated : बुधवार, 2 जून 2021 (18:35 IST)

सरकार दे वैक्सीन का हिसाब : SC ने केंद्र सरकार से कहा- पेश करें पूरे आंकड़े

सरकार दे वैक्सीन का हिसाब : SC ने केंद्र सरकार से कहा- पेश करें पूरे आंकड़े - Supreme Court Slams Centre's Vaccination Policy For 18-44 Year-Olds
नई दिल्ली। देश में कोरोनावायरस महामारी के खिलाफ वैक्सीनेशन का कार्य तेजी से चल रहा है। सरकार इन टीकों को मुफ्त में लोगों को लगा रही है। 
 
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि कोविड-19 के समस्त टीकों की खरीद का ब्योरा देते हुए वह पूरे आंकड़े बताए।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से बताने को कहा कि क्या वह मुफ्त टीका लगा रहे हैं? इससे पहले 31 मई को कोविड टीकाकरण नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को म्यूकरमाइकोसिस के इलाज पर भी जानकारी देने कहा है।

पेश करे खरीद का ब्योरा : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि कोविड-19 टीकाकरण नीति से जुड़ी अपनी सोच को दर्शाने वाले सभी प्रासंगिक दस्तावेज और फाइल नोटिंग रिकार्ड पर रखे तथा कोवैक्सीन, कोविशील्ड एवं स्पुतनिक वी समेत सभी टीकों की आज तक की खरीद का ब्योरा पेश करे।
 
न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एल एन राव और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट की विशेष पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार अपना हलफनामा दाखिल करते समय यह भी सुनिश्चित करेगी कि टीकाकरण नीति पर उसकी सोच को दर्शाने वाले सभी प्रासंगिक दस्तावेज तथा फाइल नोटिंग की प्रतियां टीकाकरण नीति के साथ संलग्न हों।
 
न्यायालय की वेबसाइट पर डाले गए 31 मई के आदेश में पीठ ने कहा, ‘‘हम केंद्र सरकार को दो सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं। पीठ ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने को कहा कि आदेश में प्रत्येक मुद्दे पर अलग-अलग जवाब दिया जाए।
 
पीठ ने कहा कि कोविड-19 के सभी टीकों (कोवैक्सीन, कोविशील्ड तथा स्पुतनिक वी) की खरीद पर आज तक के केंद्र सरकार के ब्योरे के संबंध में संपूर्ण आंकड़े। आंकड़ों में स्पष्ट होना चाहिए: (क) केंद्र सरकार द्वारा तीनों टीकों की खरीद के लिए दिये गये सभी ऑर्डर की तारीखें, (ख) हर तारीख पर कितनी मात्रा में टीकों का ऑर्डर दिया गया, उसका ब्योरा और (ग) आपूर्ति की प्रस्तावित तारीख।’’
 
शीर्ष अदालत ने 31 मई को ग्रामीण और शहरी भारत के बीच डिजिटल विभाजन को रेखांकित करते हुए कोविड टीकों के लिए कोविन प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य पंजीकरण को लेकर केंद्र से सवाल पूछे थे। शीर्ष अदालत ने कोविड-19 के प्रबंधन पर स्वत: संज्ञान लिये गये एक मामले में यह आदेश दिया है।