असंगठित क्षेत्र की बजट में उपेक्षा : विपक्ष

नई दिल्ली। विपक्ष ने जहां नोटंबदी से सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले असंगठित क्षेत्र के  लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान न करने के लिए सरकार की आलोचना की वहीं सत्तापक्ष का  कहना था कि यह अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा और इसमें समाज के हर वर्ग का ध्यान  रखा गया है।
तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने वर्ष 2017-18 के आम बजट पर लोकसभा में जारी चर्चा  में हिस्सा लेते हुए कहा कि बजट से भावी योजनाओं का खाका नहीं है और इससे आम आदमी  को कोई फायदा नहीं होगा अलबत्ता यह 'डैमेज कंट्रोल' की कवायद भर है। 
 
बनर्जी ने कहा कि नोटबंदी के कारण लघु एवं मध्यम श्रेणी के 80 प्रतिशत उद्योग धंधे बंद हो  गए। करीब 80 प्रतिशत रोजगार देने वाले असंगठित क्षेत्र पर नोटबंदी की सबसे ज्यादा मार पड़ी  है लेकिन बजट में इसका जिक्र नहीं है। 
 
उन्होंने सवाल किया कि ऐसे समय में जबकि 92 प्रतिशत गांवों में बैंक की सुविधा नहीं है तथा  ग्रामीण अर्थव्यवस्था नकदी पर आधारित है ऐसे में कोआपरेटिव बैकों को पुराने नोट बदलने की  सुविधा क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि नकदीरहित अर्थव्यवस्था में समय लगेगा। इसके  लिए जल्दबाजी ठीक नहीं है। उन्होंने लाखों रुपए डूबे हुए कर्ज की समस्या का सामना कर रहे  बैकों के लिए मात्र 10 हजार करोड़ रुपए के बजट प्रस्ताव को अपर्याप्त बताया। 
 
भाजपा के भरत सिंह ने बजट की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसमें किसानों, महिलाओं, बुनकरों  तथा डेयरी एवं सड़क, बिजली जैसे ढांचागत क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया है। उन्होंने आजादी की  लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले उत्तरप्रदेश के बलिया जिले को देश के सभी बड़े शहरों से  जोड़ने की योजना का जिक्र करते हुए इस जिले में एम्स और विश्वविद्यालय की स्थापना किए  जाने की मांग भी की। 
 
भाजपा के रामटहल चौधरी ने कहा बजट से आर्थिक विकास को गति मिलेगी तथा भ्रष्टाचार से  मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा की राशि 37,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 48,000  हजार करोड़ रुपए के बजट प्रस्ताव से गांवों से शहरों का पलायन रुकेगा जबकि अंत्योदय  योजना के तहत 5,000 ग्राम पंचायतों को गरीबी की रेखा से बाहर लाने की योजना से गरीबी  उन्मूलन में मदद मिलेगी। उन्होंने 500 करोड़ रुपए से महिला शक्ति केंद्र स्थापित किए जाने  की योजना को महिला सशक्तीकरण की दिशा में अहम बताया। (वार्ता)

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