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बजट निराशाजनक और उद्देश्यहीन : चिदंबरम

नई दिल्ली। ने बजट को बेहद निराशाजनक, दिशाहीन और उद्देश्यविहीन बताते हुए  गुरुवार को कहा कि इसमें रोजगार बढ़ाने, किसानों तथा गरीबों के उत्थान की कोई योजना नहीं  है और नोटबंदी के भयंकर निर्णय के बाद अर्थव्यस्था की हालत खस्ता हो गई है। 
पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने राज्यसभा में वर्ष 2016-17 के बजट  पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि विभिन्न योजनाओं तथा सब्सिडी के आंकड़ों पर गौर  किया जाए तो पता चलता है कि सरकार युवाओं, गरीबों, किसानों और छोटे तथा मझौले  उद्यमों के लिए केवल खोखले वादे कर रही है और बजट में इनके लिए कुछ भी ठोस नहीं  किया गया है। 
 
उन्होंने कहा कि बजट में इन वर्गों को फायदा पहुंचाने की कोई योजना नहीं दी गई है, न ही  इसमें निजी निवेश आकर्षित करने की कोई बात कही गई है। किसानों की आय दोगुना करने  की बात कहने वाली सरकार के बजट में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र ही नहीं  किया गया है। 
 
नोटबंदी को वर्ष 2016 का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे काला धन और  भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने के बजाए भ्रष्टाचार और काला धन दोनों बढ़े हैं। नोटबंदी को पूरी  तरह निरर्थक कदम बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे एक भी उद्देश्य पूरा नहीं हुआ और यह  इस कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करता है कि 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया।' (वार्ता)
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