बागी 2 : फिल्म समीक्षा

ने तेजी से अपनी पहचान एक एक्शन हीरो के रूप में बनाई है। वे मार्शल आर्ट सीखे हुए हैं और स्टंट करने में माहिर हैं। उनकी इसी खूबी और छवि को 'बागी 2' में भुनाया गया है। पूरी फिल्म इस तरह से डिजाइन की गई है कि टाइगर को अपने स्टंट्स दिखाने का मौका मिले और टाइगर ने इसमें कोई कसर बाकी नहीं रखी है। उनके फैंस जो देखना चाहते हैं, उन्हें 'बागी 2' में यह सब देखने को मिलता है, लेकिन जो फिल्म में कुछ अलग देखना चाहते हैं वे अधूरापन महसूस करते हैं।

टाइगर के किरदार का नाम है रणवीर प्रताप सिंह उर्फ रॉनी। उनके एक्शन को जस्टिफाई करने के लिए उन्हें एक स्पेशल फोर्स का कैप्टन बताया गया है। रॉनी अकेला ही सौ- दो सौ लोगों के लिए काफी है। कश्मीर में उसकी पोस्टिंग है। चार वर्ष बाद रॉनी की पूर्व प्रेमिका का नेहा (दिशा पाटनी) का गोआ से फोन आता है कि उसकी बेटी रिया गायब है। उसका अपहरण कर लिया गया है। रॉनी गोआ पहुंच कर तलाश शुरू करता है तो पता चलता है कि नेहा की तो रिया नाम की कोई बेटी ही नहीं है। नेहा का पति बताता है कि नेहा का एक्सीडेंट हुआ था और सदमे के कारण वह ऐसा कह रही है।

क्या नेहा सच कह रही है? या उसका पति सच कह रहा है? क्या रिया सचमुच में है? क्या उसका अपहरण हुआ है? इन सब प्रश्नों के जवाब रॉनी अकेला ढूंढता है।

दक्षिण भारतीय फिल्म 'क्षणम' से प्रेरित 'बागी 2' इंटरवल तक सरपट भागती है। ज्यादा सोचने का मौका नहीं दिया गया है। रॉनी की तरह दर्शक भी कन्फ्यूज रहते हैं कि कौन सही है और कौन गलत? इस कहानी के साथ-साथ दूसरी कहानी भी चलती रहती है कि क्यों नेहा और रॉनी एक नहीं हो पाएा

इंटरवल तक कई उतार-चढ़ाव आते हैं और दर्शकों को चौंकाया जाता है। जब फिल्म कमजोर पड़ती है तो फौरन मनोज बाजपेयी, रणदीप हुड्डा, प्रतीक बब्बर, दीपक डोब्रियाल जैसे कलाकारों की फिल्म में एंट्री होती रहती है। इन सबके पहले सीन बड़े खास बनाए गए हैं इससे मनोरंजन होता रहता है।

आधी दूरी तक फिल्म दर्शकों पर पकड़ बनाए रखती है, लेकिन इंटरवल के बाद यह पकड़ ढीली हो जाती है। रिया नामक बच्ची का अस्तित्व है या नहीं? अगर है तो उसका अपहरण किसने किया है? इस बात के पत्ते निर्देशक ने बहुत देर तक सीने से लगाए रखे। इससे दर्शकों के सब्र का बांध टूटने लगता है।

दरअसल लेखक और निर्देशक जानते थे कि रहस्य से परदा उठाएंगे तो फिल्म ढह जाएगी क्योंकि उनके पास जो तर्क है वो मजबूत नहीं है, लिहाजा उन्होंने बहुत सारा वक्त लिया। इस दौरान वे रॉनी-नेहा की लव स्टोरी, रॉनी के एक्शन और रॉनी के कन्फ्यूजन के जरिये दर्शकों को बहलाते रहे, ‍जिसमें उन्हें थोड़ी-बहुत सफलता भी मिली। लेकिन जब सवालों के जवाब उजागर किए गए तो अधिकांश दर्शक तो समझ ही नहीं पाएंगे कि यह सब भागमभाग क्यों हो रही है। यहां पर फिल्म बेहद कमजोर हो जाती है।

लेखकों की तारीफ इसलिए की जा सकती है उन्होंने दर्शकों को यह जानने नहीं दिया कि आगे क्या होने वाला है, लेकिन जब तर्क की बात आती है तो वे अपने बुने जाल में ही उलझते नजर आए। बात को समेटना उन्हें नहीं आया। ठीक है, मसाला फिल्मों में लॉजिक की बात नहीं करना चाहिए, लेकिन फिर भी दर्शकों को कई बातें स्पष्ट होना चाहिए।

का यूएसपी इसके एक्शन सीक्वेंसेस हैं, जो एक्शन प्रेमियों को खुश कर देते हैं। फिल्म का क्लाइमैक्स एक्शन से भरपूर है जिसमें टाइगर श्रॉफ अकेले पूरी सेना को साफ कर देते हैं। यहां पर निर्देशक से यह चूक हो गई कि वे क्लाइमैक्स को विश्वसनीय नहीं बना पाए। अचानक फिल्म गोआ से एक घने जंगल में शिफ्ट हो जाती है और शहर का आदमी अचानक विलेन जैसी हरकत करने लगता है। यह एक बहुत बड़े झटके के समान है जो आसानी से पचता नहीं है और एक्शन से भरपूर क्लाइमैक्स देखते समय अखरता है।
निर्देशक के रूप में अहमद खान ने फिल्म को असेम्बल किया है। आधी से ज्यादा फिल्म एक्शन डायरेक्टर्स ने शूट की है जिससे अहमद का काम बहुत हल्का हो गया है। कुछ काम संगीतकारों ने कर दिया जिन्होंने एक-दो अच्छे गाने बनाए, हालांकि अहमद इनके लिए अच्छी सिचुएशन नहीं बना पाए। इसके बाद जो भी काम बचा उसमें अहमद ने अपनी ताकत इस बात पर लगा दी कि फिल्म की कमजोर परतें जितनी देर बाद खुले उतना ही अच्छा। फिल्म की लंबाई को भी वे 20 मिनट कम कर सकते थे।

अभिनय के मामले में टाइगर श्रॉफ ठीक-ठाक रहे। एक्टिंग से ज्यादा उन्हें हाथ-पैर चलाने थे जिसमें वे निपुण हैं। दिशा पाटनी का रोल छोटा है और वे प्रभावित नहीं करतीं। रणदीप हुड्डा सबसे बढ़िया रहे। एक चरसी पुलिस ऑफिसर की भूमिका उन्होंने खूब मजे लेकर की। मनोज बाजपेयी अच्छे अभिनेता हैं, लेकिन निर्देशक उनका उपयोग नहीं कर पाए। मनोज और टाइगर के बीच के कुछ सीन बेहद लंबे हैं। प्रतीक बब्बर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। दर्शन कुमार और दीपक डोब्रियाल ने अपना काम ठीक से किया है। जैकलीन फर्नांडीस पर फिल्माया 'एक दो तीन' गाना एकदम ठंडा है।

कुल मिलाकर बागी 2 का हाल उस स्टूडेंट के रिजल्ट की तरह है जिसे एक विषय में तो खूब अच्छे नंबर मिले हैं, लेकिन बाकी विषयों में बस पास ही हुआ है।

बैनर : नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, फॉक्स स्टार स्टूडियोज़
निर्माता : साजिद नाडियाडवाला
निर्देशक : अहमद खान
संगीत : मिथुन, आर्को प्रावो मुखर्जी, गौरव रोशिन, संदीप शिरोडकर, दर्शन कुमार
कलाकार : टाइगर श्रॉफ, दिशा पटानी, मनोज बाजपेयी, रणदीप हुड्डा, प्रतीक, दीपक डोब्रियाल, दर्शन कुमार, जैकलीन फर्नांडीस (मेहमान कलाकार)
सेंसर सर्टिफिकेट : यूए * 2 घंटे 24 मिनट 46 सेकंड
रेटिंग : 2.5/5

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