Widgets Magazine

खरमास शुरू, इस दौरान न करें कोई भी शुभ कार्य...

* खरमास : समस्त शुभ कार्यौं पर लगेगा विराम


 
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन माह की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा यानी होलिका दहन तक होलाष्टक का प्रभाव माना जाता है। इस बार 12 मार्च को होलिका दहन और 13 मार्च को धुलेंडी (होली यानी रंगों से होली खेलने की परंपरा) का पर्व संपन्न हुआ। 

आरंभ : जानिए वैज्ञानिक रहस्य और महत्व
 
होली के तुरंत बाद 14 मार्च से खरमास प्रारंभ हो गया है, इस दौरान अगले 30 दिनों तक यानी एक माह तक नहीं होंगे। खरमास का प्रभाव 14 अप्रैल को खत्म होगा। 
 
हिन्दू पंचांग और ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य एक राशि में एक महीने तक रहता है। जब सूर्य 12 राशियों का भ्रमण करते हुए बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करता है, तो अगले एक माह की अवधि को खरमास कहा जाता हैं। 

 
 
मान्यता है कि खरमास के दौरान बच्चे का मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, कर्ण छेदन, गृह आरंभ, गृह प्रवेश, वास्तु पूजा, कुआं एवं बावड़ी उत्खनन, राजसी कार्य, दिव्य यज्ञ अनुष्ठान जिसमें लक्ष्यचंडी तथा सहस्त्रचंडी यज्ञ के साथ ही वैदिक कर्म त्याग दिए जाते हैं। इस दौरान शुभ मांगलिक विवाह आदि शुभ कार्य पूरी तरह रहते हैं।

कोई नया निवेश, व्यापार-व्यवसाय आदि भी नहीं शुरू किया जाता है। इस माह में खास तौर पर धर्म के प्रति समर्पण भाव से इष्ट की आराधना, वैष्णव तथा शिव मंदिरों में जाकर सत्संग व कीर्तन का लाभ लेना चाहिए। इस माह में वस्त्र-भोजन तथा औषधि का दान करना श्रेष्ठ होता है।
 

Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।
Widgets Magazine
Widgets Magazine