test header

नर्मदा में 'पाले' जाएॅगे बेन्थोस

भोपाल| Naidunia| पुनः संशोधित गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012 (01:10 IST)
मप्र में नर्मदा नदी का स्वास्थ्य ठीक रखने यानि प्रदूषण से बचाने के लिए बेन्थोस नाम के उस कीड़े को 'पाला'जाएगा,जो किसी भी नदी के स्वस्थ रहने के सूचक होते हैं। इस काम पर आने वाले वर्षो में लगभग सौ करोड़ रुपये खर्च किये जाएँगे।

नर्मदा नदी स्वास्थ्य सुरक्षा की ऐसी वैज्ञानिक पहल अब तक देश की किसी भी नदी की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए नहीं हुई है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की इस कार्ययोजना को नर्मदा बायो हेल्थ मानिटरिंग नाम दिया गया है। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गहरी रूचि दिखाई है और परियोजना को आगे बढाने के निर्देश दिये हैं। उनका भी व्यक्तिगत अनुभव है कि पिछले 20-25 वर्ष पूर्व नर्मदा के जल में पाए जाने वाले अनेक जीव-जन्तु अदृश्य हो रहे हैं।जो जल के शुद्ध होने का संकेत होते हैं। बहरहाल प्रस्तावित प्रणाली में नर्मदा के उद्गम से लेकर मप्र की सीमा तक विभिन्ना स्थलों पर अध्ययन केंद्र स्थापित होंगे। इनमें जल में पाए जाने वाले रीढरहित जीव-जन्तु बेन्थोस का अध्ययन होगा। बेन्थोस प्रदूषण सहन नहीं कर पाते हैं और उनकी पर्याप्त उपलब्धता जल की अच्छी गुणवत्ता का सूचक होती है। बेन्थोस के अध्ययन के साथ ही अन्य अध्ययन अनुसंधान के आधार पर नर्मदा की बायो मेपिंग करके जल गुणवत्ता स्थिर रखने के उपाय होंगे।

नर्मदा किनारे के शहरों और बस्तियों से निकलने वाले मल-जल के शुद्धिकरण की आधुनिक तकनीक स्थानीय प्रसाशन को उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके लिए स्थानीय शासन को प्राधिकरण की ओर से समुचित आर्थिक सहायता भी देना प्रस्तावित है। बायो हेल्थ मानिटरिंग के लिए सक्षम एजेन्सियों को कार्य प्रकृति के बारे में प्रशिक्षित कर फिर प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएँगे।



'गंगा और देश की अन्य बड़ी नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने की अब तक लागू की गई बड़े बजट की कई परियोजनाओं के अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं। इसी के दृष्टिगत नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त रखने कनाडा,आस्ट्रेलिया,फ्रान्स आदि देशों में नदियों के स्वास्थ्य अनुसंधान और अध्ययन की तर्ज पर नर्मदा बायो हेल्थ मानिटरिंग प्रणाली विकसित की गई है।

-ओपी रावत,उपाध्यक्ष एनवीडीए


और भी पढ़ें :