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नर्मदा की महिमा अपार

बड़वानी | Naidunia| पुनः संशोधित गुरुवार, 10 नवंबर 2011 (10:05 IST)
ज्ञान, भक्ति, कर्म, तप, सत्संग तथा सेवा के उद्देश्य को लेकर प्रकाश ज्ञान शक्ति केंद्र बदलापुर (महाराष्ट्र) द्वारा आयोजित श्री नर्मदा परिक्रमा यात्रा का दल मंगलवार की रात्रि बड़वानी आया। यहाँ से बुधवार सुबह एक जुलूस के रूप में नर्मदा तट राजघाट रवाना हुआ।

सद्गुरु श्री वासुदेव वासन बापट गुरुजी के नेतृत्व में निकली नर्मदा परिक्रमा के दल में 300 लोग शामिल हैं, जिनमें 170 महिलाएँ एवं 100 पुरुष है। इनमें 6 माह के बच्चे से लेकर 84 वर्ष की आयु तक के परिक्रमवासी हैं। नगर के तुलसीदास मार्ग स्थित श्री बाँके बिहारी मंदिर से निकला परिक्रमावासियों का जुलूस प्रमुख मार्गों से होते हुए नर्मदा तट राजघाट पहुँचा। वहाँ तुलसीराम यादव एवं माँ नर्मदा सेवा समिति के सदस्यों ने स्वागत कर स्वल्पहार करवाया।

जुलूस में पं. वासुदेवानंद सरस्वती स्वामी महाराज की पालकी भी थी, जिसे परिक्रमावासी उठाए चल रहे थे। साथ में नाम स्मरण चरण पादुका भी वाहन पर सुसज्जित थी। भक्त परिक्रमावासी भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे। परिक्रमा यात्रा के साथ सूफी संत शशाणी महाराज कुर्ला (मुंबई) और रफीक भाई भी थे।

राजघाट में परिक्रमावासियों ने श्री दत्त मंदिर में पूजन-अर्चन कर आरती की। इस दौरान श्रद्धालु झूम उठे। यात्रा के साथ चल रहे पूर्णे के शासकीय अधिकारी एवं नर्मदा भक्त मंदार केलकर ने बताया कि नर्मदा परिक्रमा यात्रा 5 नवंबर को बदलापुर महाराष्ट्र से 8 बसों द्वारा निकली थी। 7 नवंबर को ओंकारेश्वर पहुँचे। वहाँ परिक्रमा संकल्प विधि के बाद राजघाट बड़वानी आए। यहाँ से वे प्रकाशा, गोरागाँव, भालोद, नारेश्वर, कढपोर, मिठीतलाई, तिलकवाड़ा, कोटेश्वर, मांडू, महेश्वर, बड़वाह, नेमावर, बरेली, जबलपुर, अमरकंटक, महाराजपुर, होशंगाबाद, हरदा होते हुए ओंकारेश्वर आकर वहाँ से खोपोली जाकर 10 दिसंबर को नर्मदा परिक्रमा का समापन करेंगे। यात्रा के दौरान प्रतिदिन 10 से 12 किमी की सुबह नर्मदा किनारे गाँवों, शहरों में पालकी यात्रा निकाली जाएगी। 1 माह की इस परिक्रमा यात्रा के दौरान यज्ञ भी होंगे।

सेवाभावियों का सहयोग

उन्होंने बताया कि वासुदेवानंद सरस्वती स्वामीजी के 100वें स्मृति दिन के उपलक्ष्य को लेकर भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। परिक्रमा के दौरान जगह-जगह सेवाभावी लोगों का सहयोग मिलता है। -निप्र



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