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नर्मदा किनारे के किसान परेशान

बड़वानी | Naidunia| पुनः संशोधित शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011 (23:51 IST)
नर्मदा किनारे के किसान जब नदी में जल स्तर बढ़ता है तो सिंचाई हेतु डाली गई पाइप लाइनों को हटाते हैं और जल स्तर कम होने पर पुनः पाइपों को बढ़ाते हैं। उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी तब आती है, जब जल स्तर कम होता है और की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

गौरतलब है कि वर्ष 2007 में जुलाई माह में बाँधों का छोड़ा गया पानी बिना सूचना के नर्मदा में आ जाने से बड़वानी और धार जिले के अनेक किसानों की मोटरें, पाइप लाइनें डूब गई थीं। इनमें से कुछ की बह भी गई थीं। इसके बाद ये किसान वर्षभर नदी के जल स्तर पर सतर्क नजर रखते हैं। नर्मदा किनारे के किसान इन दिनों गन्नाा, केला, पपीता, मिर्च और अन्य फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। नर्मदा का जल स्तर घटते ही वे नदी के किनारे अपनी पाइप लाइनों को नीचे उतारने में जुट गए हैं।

कृषक कैलाश यादव ने बताया कि किनारों पर कमर बराबर गाद जमा हो गई है। ऐसे में पाइप लाइन नीचे डालने और हटाने में सर्तकता रखनी पड़ती है। जागरवा, अवल्दा, भामटा, पिछोड़ी, राजघाट, कसरावद, बड़दा तक के किनारों पर ऐसी ही गाद की स्थिति बनी है। किनारों पर मोटर को रखने के लिए पत्थर व लकड़ी जमाना पड़ती है, ताकि मोटर गाद में न धँसे।

चार साल बाद भी

मुआवजा नहीं

कृषक लोकेंद्र ने बताया कि कई पाइप अभी भी किनारों पर गाद में दबे हुए हैं। ऐसे में भी किसान को आर्थिक नुकसान होता है। 4 वर्ष पूर्व नर्मदा में एकदम जल स्तर बढ़ा था और उसकी कोई सूचना किसानों को नहीं थी, तब भी कई मोटरें व पाइप डूब गए थे। उसका आज तक शासन-प्रशासन ने कोई मुआवजा नहीं दिया।


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