क्या खर्राटे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं?

लंदन| भाषा| पुनः संशोधित मंगलवार, 8 दिसंबर 2009 (23:04 IST)
मुमकिन है कि यह खबर खर्राटे लेने वाले लोगों के नजदीकियों को ज्यादा खुशी न दे लेकिन नींद में चलने वाली इस प्रक्रिया पर हाल ही में किए गए एक शोध के नतीजे कुछ ऐसे ही विवादों को न्योता देते हैं।

सालों तक इस अवस्था को नींद में साँसों की तकलीफ और दिल के दौरों से जोड़ा जाता रहा, लेकिन में 65 से ज्यादा उम्र के छह सौ लोगों पर किए गए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि खर्राटे नहीं लेने वालों लोगों के बनिस्पत इसकी आदत रखने वालों की जीवन प्रत्याशा अधिक होती है।
द डेली मेल के मुताबिक अध्ययन के नतीजे इस बात का भी दावा करते हैं कि सामान्यत: स्वस्थ समूहों के मुकाबले खर्राटे लेने वाले लोगों को समय से पहले मृत्यु का खतरा कम रहता है। यह उन मामलों में भी लागू है होता जहाँ खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को पहले से स्वास्थ्य की कुछ तकलीफें होती हैं।

रिपोर्ट कहती है कि एक सिद्धांत तो यह है कि ऑक्सीजन और शरीर के अंगों में रक्त की आपूति में निरंतर पैदा होने वाली बाधा से साँसों में ठहराव आता है। इससे दिल और दिमाग मजबूत होता है और इसका मतलब यह हुआ कि दिल के दौरों से निपटने में शरीर दूसरों के बनिस्वत ज्यादा सक्षम होता है।
हालाँकि लॉगबॉरो यूनीवर्सिटी के स्लीप रिसर्च सेंटर के प्रोफेसर जिम होर्ने कहते हैं कि यह मान लेने से कि खर्राटे लंबी उम्र देते हैं, बेहतर है इसका इलाज कराना। खर्राटे किसी की साँसों में दस सेकंड तक हवा की आपूर्ति बाधित कर सकते हैं। खर्राटे की खास ध्वनि उस वक्त पैदा होती है, जब नींद के दौरान नाक-मुँह और गले की माँसपेशियाँ आराम कर रही होती हैं।
इसकी कई वजहें बताई जाती हैं मसलन नींद के दौरान शरीर की स्थिति ज्यादा वजन नाक का बंद होना आदि। शराब पीना भी खर्राटे लेने की एक वजह हो सकती है। (भाषा)


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