ग्लूकोमा यानी काला मोतिया

आँखों की अनदेखी ना करें

ग्लूकोमा
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भारत में के प्रमुख कारणों में से एक कारण काला मोतिया या ग्लूकोमा है। इस बीमारी के कारणों को देखने के पहले हमें आँख की रचना समझना होगी। आँख में स्थित कॉर्निया के पीछे आँखों को सही आकार और पोषण देने वाला तरल पदार्थ होता है, जिसे कहते हैं।

लेंस के चारों ओर स्थित सीलियरी टिश्यू इस तरल पदार्थ को लगातार बनाते रहते हैं। और यह द्रव पुतलियों के द्वारा आँखों के भीतरी हिस्से में जाता है। इस तरह से आँखों में एक्वेस ह्यूमर का बनना और बहना लगातार होता रहता है, स्वस्थ आँखों के लिए यह जरूरी है।

आँखों के भीतरी हिस्से में कितना दबाव रहे यह तरल पदार्थ की मात्रा पर निर्भर रहता है। जब ग्लूकोमा होता है तब हमारी आँखों में इस तरल पदार्थ का दबाव बहुत बढ़ जाता है। कभी-कभी आँखों की बहाव नलिकाओं का मार्ग रुक जाता है, लेकिन सीलियरी ऊतक इसे लगातार बनाते ही जाते हैं।

ऐसे में जब आँखों में ऑप्टिक नर्व के ऊपर पानी का दबाव अचानक बढ़ जाता है तो ग्लूकोमा हो जाता है। अगर आँखों में पानी का इतना ही दबाव लंबे समय तक बना रहता है तो इससे आँखों की ऑप्टिक नर्व नष्ट हो सकती है। समय रहते यदि इस बीमारी का इलाज नहीं कराया जाता तो इससे दृष्टि पूरी तरह जा सकती है।

ग्लूकोमा के प्रकार

ओपन एंगल ग्लूकोमा- अधिकांश रुप से यही ग्लूकोमा होता है। इसमें तरल पदार्थ मुख्यतः आँखों की पुतलियों से होकर आँखों के दूसरे भागों में बहता है और द्रव वहाँ नहीं पहुँचता जहाँ इसे छाना जाता है। जिससे आँखों में इस द्रव का दबाव बढ़ जाता है कि दृष्टि कमजोर हो जाती है।

लो टेंशन या नॉर्मल एंगल ग्लूकोमा - इसमें आँखों की तंत्रिका नष्ट हो जाती है और देखने की क्षमता में कमी आ जाती है।

एंगल क्लोजर ग्लूकोमा - इस प्रकार के ग्लूकोमा में आँखों के द्रव का दबाव अचानक ही बहुत बढ़ जाता है, और दबाव को कम करने के लिए तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है।

कन्जनाइटल ग्लूकोमा - इसमें जन्म से बच्चे को ग्लूकोमा के लक्षण पाए जाते हैं।

क्या होते हैं लक्षण

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अधिकांश लोगों को ग्लूकोमा के बारे में कम ही जानकारी है इसलिए इसके लक्षणों को तब तक पहचाना नहीं जाता जब तक कि उन्हें आँखों से कम नहीं दिखाई देने लगता। इस बीमारी के शुरुआती दौर में जब आँखों की तंत्रिकाओं की कोशिकाएँ मामूली रूप से टूटने लगती हैं तो आँखों के सामने छोटे-छोटे बिंदु और रंगीन धब्बे दिखाई देते हैं। पहले-पहल लोग इन लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते परिणामस्वरुप उन्हें हमेशा के लिए अपनी आँखों की रोशनी खोनी पड़ती है।

ग्लूकोमा के जितने भी प्रकार हैं उनमें से एक्यूट एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा के लक्षणों की पहचान पहले से की जा सकती है क्योंकि यह बीमारी धीरे-धीरे आती है। इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं लेकिन अलग-अलग लोगों में ये अलग हो सकते हैं- आँखों के आगे इंद्रधनुष जैसी रंगीन रोशनी का घेरा दिखाई देना, सिर में चक्कर और मितली आना, आँखों में तेज दर्द होना आदि।

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हालाँकि एक्यूट एंगल ग्लूकोमा के ये लक्षण आँखों की दूसरी समस्याओं में भी देखे जा सकते हैं। उपरोक्त लक्षणों में से अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को किसी भी लक्षण का आभास हो तो आप तत्काल नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।


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