नववर्ष 2018 : नए साल पर लें ये 21 संकल्प, जीवन बनेगा खुशहाल

Happy New Year 2018
 
 
 
* खुद में लाकर बदलाव होगा नूतन वर्ष खुशहाल  
कई खट्टी-मीठी यादों को पोटली में समेटे पुराना वर्ष अतीत के गर्त में समाने को है व नया वर्ष उम्मीदों, सपनों व आशाओं का पिटारा ले आने को तत्पर। पीछे मुड़कर देखें तो पर तारीखें बदलती हैं और हर दिन  अतीत बन जाता है और हम वहीं खड़े ठगे से दिखते हैं। 
 
साल-दर-साल उम्र बढ़ती जाती है। बचपन, जवानी में और जवानी बुढ़ापे की ओर अग्रसर होती है। पढ़ाई,  करियर की चिंता, घर-परिवार की जिम्मेदारी, बच्चों का पालन-पोषण, समाज के रीति-रिवाजों, रिश्तों का निर्वाह  इन सब में गुम हो जाते हैं हमारे अपने सपने, अपनी इच्छाएं, आकांक्षाएं। अपनी मर्जी से चलने का सुख असीम संतोष व सुकून देता है। लेकिन अपनी गलत सोच में, गलत आदतों में बदलाव भी आवश्यक है। नए वर्ष में कई संकल्प लेने का आव्हान होता है लेकिन जनवरी गुजरते-गुजरते सबकुछ 'पहले-सा' हो जाता है व नए साल का जोश ठंड के आगोश में दुबक जाता है। लेकिन अगर जीवन को बेहतर बनाना हो तो स्वयं में कुछ बदलाव लाने होंगे, जो बेहतर भविष्य की नींव बनेंगे।
 
1. सपने देखिए व साकार करने का प्रयास कीजिए।
2. अपने सपनों को पूरा करने के लिए क्या-क्या प्रयास हों, इसका विचार कीजिए।
3. लगातार अपने सामर्थ्य को मेहनत व लगन से बढ़ाइए।
4. नया पढ़ें, लिखें व उस पर मनन करें।
5. नई सोच विकसित करें।
6. सकारात्मक मानसिकता से अच्छी चीजों को ग्रहण करें।
7. चीजों को देखने का नजरिया बदलें।
8. अपनी असफलताओं पर निराश होने की बजाए उपलब्धियों पर संतोष करना सीखें।
9. अपनी कमजोरियों व गलतियों को उदारता से स्वीकार कर आत्ममंथन कर उन्हें सुधारें।
10. नई टेक्नोलॉजी का महत्व समझ उसे सीखें।
11. नई पीढ़ी के विचारों को उनके दृष्टिकोण से समझ संकीर्ण मानसिकता छोड़ उदारता से उन्हें स्वीकारें।
12. अतीत का अफसोस छोड़ वर्तमान का सुख भोगें व उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयास करें।
13. स्वास्थ्य को सर्वोपरि समझ व्यायाम, योग, प्रतिदिन टहलने या घूमने का महत्व समझें।
14. खान-पान के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझें व उचित आहार लें।
15. अपने अच्छे शौक, इच्छाएं, आकांक्षाएं अवश्य पूरी करें। अपने लिए जीने को अपराध न समझें।
16. अपने अहं या अभिमान की वजह से अगर करीबी रिश्तों में दरार आई है तो सबकुछ भुला रिश्तों की  गरिमा पुन: बनाएं।
17. आप अगर संपन्न हैं तो सामाजिक दायित्व का निर्वाह करते हुए कमजोर लोगों की मदद करने की मानसिकता विकसित करें।
18. अन्याय का विरोध करने हेतु संगठित हो आवाज उठाने का जज्बा पैदा करें।
19. व्यवस्था पर मात्र टीका-टिप्पणी करने के स्वयं उसमें सुधार के प्रयास करें।
20. स्वयं अपने लिए जीने का प्रयास करें, खुश रहें व शौक पूरे करें।
21. प्रकृति व पर्यावरण के लिए अपना योगदान दें व उसके सान्निध्य का सुख अनुभव करें।
 
अगर हम स्वयं में बदलाव लाएंगे तो बहुत-सी शिकायतें स्वयं खत्म होंगी व अवश्य खुशहाल होगा। > - डॉ. साधना सुनील विवरेकर
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