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महिला बॉडी बिल्डिंग का उभरता नाम : अश्विनी वासकर


जो लोग यह सोचते हैं कि बॉडी बिल्डिंग बनाना सिर्फ पुरुषों का ही शगल है उनके लिए एक शानदार जवाब है। अश्विनी का नाम अब किसी से अपरिचित नहीं रहा। अश्विनी की पहचान सफल और सशक्त प्रतिस्पर्धी के तौर पर उभरी है। अश्विनी मूलतः महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले की निवासी हैं।
   
32 वर्षीया अश्विनी ने अब तक प्रचलित तमाम मिथकों को पीछे छोड़ते हुए इस क्षेत्र को अपनाया है। इस क्षेत्र में उनका आना एक सुखद संयोग है। जब उन्होंने इसे अपना करियर बनाना चाहा तब भी उनका अपना एक सुरक्षित करियर था। एक सफल बॉडी बिल्डर बनने के लिए अश्विनी ने मत्स्योपादन का पूर्णकालिक कार्य छोड़ दिया। 
 
बतौर बॉडी बिल्डिंग प्रशिक्षक अपने काम से प्रसन्न अश्विनी बताती है कि पहले मैं अपनी बॉडी को लेकर खुश नहीं थी। लेकिन आज जिस तरह की मेरी बॉडी बनी है उस तक पहुंचना भी कोई सरल रास्ता नहीं था। अपने फिगर को शेप में लाने के लिए बहुत ही मुश्किल वेटलिफ्टिंग रूटीन और हाई प्रोटीन डाइट के सहारे मैंने अपना अतिरिक्त वजन कम किया और मसल्स बनाना आरंभ किया। 
 
जब अश्विनी ने यह क्षे‍‍त्र अपनाया तो विरोध वैसा सामने नहीं आया जैसा कि सोचा जा रहा था बॉडी बिल्डिंग से इतर विरोध या हलचल इस बात की अधिक थी कि इसके लिए पहनी जाने वाली ड्रेस अजीब सी है। 
 
बकौल अश्विनी : मैं सचमुच बहुत मोटी थी। फिटनेस को मेंटेंन करने के लिए मैंने जिम ज्वॉइन किया। उत्साह में आकर मैंने भारी वजन उठाया और हाइ प्रोटीन डाइट ली.. परिणाम यह हुआ कि मैंने वजन तो कम कर लिया पर मेरा शरीर बहुत मजबूत हो गया। फरवरी 2013 में जब मैं एक पुरुषों की बॉडी बिल्डिंग कांपीटिशन में पहुंची तो यकायक ख्याल आया कि यह भी एक करियर ऑप्शन हो सकता है। मैं ना सिर्फ उन प्रतिभागियों को देखकर रोमांचित हुई बल्कि खुद को लेकर भी यह कल्पना मुझे खुशी से भर देने वाली थी।  
 
वहीं पर एक आगामी महिला शरीर सौष्ठव प्रतिस्पर्धा की घोषणा की गई। वे पूछ रहे थे कि क्या कोई और इसमें भाग लेना चाहता है? मुझे लगा कि क्यों ना एक कोशिश की जाए... शायद यह अपनी तरह का अनोखा ही प्रयास होगा विशेषकर इस उम्र /30 वर्ष/ में...गैर परंपरागत और कठिनतम रास्ता चुनना निसंदेह चुनौतीपूर्ण था। 
 
क्या-क्या सवाल खड़े नहीं हो सकते थे...लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अश्विनी के सामने ऐसा कोई सवाल नहीं  आया। किसी ने यह नहीं कहा कि तुम यह सब क्यों कर रही हो, यह महिलाओं के लिए नहीं है। ना तो किसी मि‍‍‍त्र ने ना ही परिवार वालों ने.. सवाल था तो बस यह कि इसमें कैसे खुले कपड़े पहनने पड़ते हैं....        
 
अश्विनी कहती हैं : हम लोग मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और बस जो थोड़ी बहुत चिंता थी वह इसी बात की थी कि कपड़े के बारे में कुछ किया जाए... 
 
फिर जब अश्विनी के पिता भालचंद्र वासकर बेटी के फैसले के साथ हुए तो वह तमाम बाधाएं भी दूर हो गई। पिता के अनुसार, कपड़े तो खेल का हिस्सा हैं। एक्सरसाइज का हिस्सा हैं। तुम अपना शरीर नहीं बेच रही हो बल्कि दु‍निया को तुम वह दिखा रही हो जो तुमने अपनी मेहनत और पसीने से कमाया है।   
 
अश्विनी के लिए पिता से मिला प्रोत्साहन खुशी से सराबोर कर देने वाला था। और अब तो यह आलम है कि उसके शहर का हर खेल संगठन उसे मदद करने को तत्पर है। हालांकि आज भी एक अछूता क्षेत्र क्यों है..इस सवाल के जवाब में सिर्फ खामोशी है हमारे पास... तथ्यों के आइने में सत्य यह है कि की दुनिया में उम्मीद का नया सूर्य उदित करने का श्रेय अश्विनी को जाता है। 
 
फिटनेस ट्रेनर अश्विनी की आंखों की चमक बढ़ जाती है जब वह कहती है -मुझे अभी भी पूरी उम्मीद है कि एक दिन चीजें बदलेंगी और इस क्षे‍‍त्र को लोग सम्मान की नजर से देखेंगे। अब तेजी से महिलाएं इस क्षेत्र को अपना रही हैं। अपनी फिटनेस को लेकर भी अब महिलाएं और युवतियां जागरूक हुई हैं। मैं सच में उन लड़कियों को प्रशिक्षित करना पसंद करूंगी जो इसमें आना चाहती हैं और प्रतिस्पर्धा में भाग लेना चाहती हैं। मुझे अच्छा लगता है जब बच्चियां मुझसे सीखने आती हैं। 
 
अश्विनी ने कई प्रतियोगिताओं और वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग एंड फिजीक चैंपियनशिप के लिए जमकर पसीना बहाया है। कई बड़े सम्मान आज उनके नाम हैं। परंपरा से हटकर उन्होंने सिर्फ इस क्षेत्र को अपनाया ही नहीं है बल्कि दिल से मेहनत कर  एक मुकाम भी हासिल किया है। 

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