घर की जमीन से निकलने वाली चीजें देती हैं शुभ-अशुभ संकेत


इस ब्रह्माण्ड का एक भाग जिसे या भूमंडल के नाम से जाना जाता है, जिसे जीवन की उत्पत्ति का श्रेय प्राप्त है। इसके अंदर-बाहर जीवन की लहरें दौड़ रही हैं, जिन्हें जलचर, थलचर, नभचर के नाम से जाना जाता है। भूखंड प्रकृति की अनुपम देन है जिसे जरूरत के अनुसार घर, गांव, कस्बा, जिला, शहर, प्रदेश या देश में विभक्त किया गया है।

इस भूखंड को कई नामों से पुकारा या जाना जाता है जैसे- वसुन्धरा, भू, पृथ्वी, धरणी, धरा, वीरभोगनी, हिरण्यगर्भा, रत्नगर्भा, वेदगर्भा, आधार शक्ति आदि।

पंचतत्वों के योग से जीवन की उत्पत्ति हुई है, यह पंच तत्व मिलकर जीवन का संचालन करते हैं जिसमें पृथ्वी (क्षिति) को प्रथम तत्व कहा जाता है। वास्तु शास्त्र इन पंच तत्वों का तालमेल बिठाते हुए भवन निर्माण के नियम तय करता है जिसके अन्तर्गत भू परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के दौरान भूखंड की मिट्टी, उसका रंग, गंध, स्वाद तथा उसकी गहराई, ऊंचाई, आकार इत्यादि पहुलओं का क्रमश: परीक्षण किया जाता है जो उस भूखंड की प्रकृति तथा लाभ, हानि के निर्धारण में अति सहायक भूमिका निभाते हैं।

भूमंडल के अंदर कई ऐसे ज्ञात-अज्ञात तथ्य छिपे हुए हैं जिनसे जीवन सदैव प्रभावित होता रहता है। इन भूखंड़ों के प्रभावों को आज बड़ी तेजी से मानव, पशु-पक्षी, पेड़-पौधों में देखा जा रहा है। वास्तव में प्रत्येक भूखंड में कोई न कोई राज और आश्चर्यजनक विषमताएं जरूर छिपी रहती हैं।

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