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फिल्म का बनना अरेंज्ड मैरिज के जैसा रहा
तनुजा चन्द्रा की बीबीसी से विशेष बातचीत
निर्देशक तनुजा चन्द्रा की नई फिल्म 'होप एंड ए लिटिल शुगर' इन दिनों काफी चर्चा में है। भारतीय निर्देशक और अमेरिकी निर्माता वाली इस अँगरेजी फिल्म का नाम तो दिलचस्प है ही, इसके बनने के पीछे की कहानी और भी रोचक है। निर्माता अमेरिका में, निर्देशक भारत में- दोनों एक-दूसरे से कभी नहीं मिले। सात समंदर पार इंटरनेट के जरिए फिल्म का काम हुआ। तनुजा इस पूरे किस्से को अरेंज्ड मैरिज कहती हैं।

प्रश्न : आपकी नई फिल्म है 'होप एंड ए लिटिल शुगर...' क्या कहानी है?
उत्तर : फिल्म कुछ भारतीयों की कहानी बयाँ करती है जो न्यूयॉर्क में 9/11 के हमले के वक्त वहाँ रहते थे। ये मुस्लिम-सिख प्रेमी कहानी है। फिल्म में दिखाया गया है कि जब अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हमला हुआ था तो कैसे आम आदमी के दिल में नफरत और गुस्सा पनपने लगा- आप अपना दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकते और चाहते हैं कि उन लोगों को दुनिया से मिटा दें जो आपकी नजर में हमले के लिए जिम्मेदार हैं। इसकी वजह से और भी नफरत पैदा होती है। फिल्म हिंसा के इस कुचक्र के खिलाफ संदेश देती है कि हिंसा से कोई फायदा नहीं है।

प्रश्न : इसे क्रॉसओवर फिल्म कहेंगी आप?
उत्तर : मैं इसे विश्व सिनेमा कहूँगी क्योंकि फिल्म अँगरेजी में है और किरदार भारतीय हैं, पृष्ठभूमि न्यूयॉर्क की है और दिल एक तरह से हिन्दुस्तानी है। फिल्म में कुछ अमेरिकी कलाकार भी हैं। निर्माण के हिसाब से ये पूर्व और पश्चिम का फ्यूजन है।

प्रश्न : फिल्म का नाम बड़ा दिलचस्प है-होप एंड ए लिटिल शुगर?
उत्तर : एक बार जब मैं न्यूयॉर्क के हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन विभाग में थी तो फिल्म का नाम पढ़कर अधिकारी के चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ गई। इटली, कराची जहाँ भी मैं गई फिल्म का नाम सुनकर सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

दरअसल फिल्म में महिमा चौधरी का एक डॉयलॉग है कि जिंदगी में ऐसी कोई समस्या नहीं जिसे उम्मीद और थोड़ी-सी मिठास के सहारे नहीं सुलझाया जा सकता। यानी दिल में कुछ उम्मीद हो कि बेहतर जीवन मिले और थोड़ी-सी मिठास हो तो सब ठीक हो जाएगा। यही फिल्म का फलसफा है।

प्रश्न : फिल्म की स्टारकास्ट भी दिलचस्प है- महिमा पिछले कुछ सालों से फिल्म उद्योग में हैं। हीरो अमित सयाल बिलकुल नए हैं जबकि अनुपम खेर वरिष्ठ कलाकार हैं। काम में मजा आया?
उत्तर : क्योंकि स्टारकास्ट का एक अजीब-सा कॉम्बिनेशन है इसलिए दिलचस्प रहा। महिमा बहुत अच्छी अभिनेत्री हैं, अंडररेटिड हैं। एक तरह से ये महिमा की कमबैक फिल्म होगी। फिल्म के हीरो नए हैं। मैंने हमेशा ही नए कलाकारों के साथ काम करना पसंद किया है। अमित सयाल दिल्ली में थिएटर कलाकार थे। उनका ऑडिशन जब देखा तो एक अलग ही ठहराव था उनकी एक्टिंग में। नए कलाकार में अगर कुछ स्पार्क हो और निर्देशक उसे बाहर लाने में सफल रहे तो स्क्रीन पर कमाल की चीज देखने को मिलती है।

दरअसल नए एक्टर से आप उम्मीद कुछ नहीं करते और बदले में बेहतरीन काम देखने को मिल जाए तो मजा आ जाता है। रही अनुपम खेर की बात तो काफी समय से मन था उनके साथ काम करने का, बेहतरीन काम किया है उन्होंने।

प्रश्न :फिल्म के निर्माता अमेरिका के हैं, आप और आपकी टीम भारत में। सात समंदर पार का मामला था। तालमेल कैसे हुआ दोनों तरफ से?
उत्तर : मेरे पास कहानी तैयार थी, लेकिन आखिरी क्षण में निर्माताओं ने हाथ खींच लिए। तब न्यूयॉर्क के दो अमेरिकी निर्माताओं ने मुझे ई-मेल किया कि वे ये फिल्म बनाना चाहते हैं-उन्होंने मेरी कहानी पढ़ी थी। मैं इन लोगों को जानती नहीं थी, वो मुझे जानते नहीं थे- कभी मुलाकात भी नहीं हुई थी। प्री-प्रोडक्शन का काम इंटरनेट के जरिए हुआ। पहली मुलाकात निर्माताओं से तब हुई जब हम शूटिंग के लिए न्यूयॉर्क पहुँचे आधी टीम भारतीय थी और आधी अमेरिकी।

कभी-कभी कम्यूनिकेशन गैप भी होता था। जब कभी हम लोग बहुत नाराज होते थे तो आपस में हिन्दी में बात करने लगते थे और उनकी दिल भर के बुराई करते थे (हँसते हुए)। वो लोग समझ भी नहीं पाते थे कि हम क्या बात कर रहे हैं। लेकिन उनके पास ये सुविधा नहीं थी क्योंकि वो तो अँगरेजी में ही बात कर सकते थे।

प्रश्न : फिल्म को आप कराची भी लेकर गईं, फिल्म सिख-मुस्लिम प्रेम कहानी है। वहाँ क्या प्रतिक्रिया रही?
उत्तर : कराची जाकर मुझे सबसे अच्छा लगा। पारंपरिक तौर पर भारत-पाकिस्तान विरोधी खेमे में माने जाते हैं लेकिन मुझे वहाँ बहुत प्यार मिला। आज भी मुझे ई-मेल करते हैं- इतना प्यार कोई दुश्मन थोड़े ही दिखाएगा। शुरू में मैं घबराई हुई थी। फिल्म में एक चरित्र दूसरे मुस्लिम चरित्र से नफरत करता है तो जाहिर है कि वो कई तीखी बातें कहेगा।

हो सकता है कि कुछ दर्शकों को अच्छा न लगे। लेकिन पाकिस्तानी दर्शक बहुत परिपक्व थे, वो समझ पा रहे थे कि यह फिल्म में एक व्यक्ति विशेष का नजरिया है और फिल्म यही कहना चाहती है कि नफरत नहीं होनी चाहिए। वहाँ के वितरकों ने कहा कि वे इस फिल्म को खरीदना चाहते हैं। वे निर्माताओं से संपर्क में हैं।
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