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क्रिकेट के बहाने देशसेवा
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मधुसूदन आनंदआप लोग मुझ पर हँसें नहीं और न ही क्रोध में भृकुटि तानें तो मैं आपको एक राज की बात बताना चाहूँगा। मैं भारत के उन महान सपूतों में से एक हूँ, जो गुजरात के यशस्वी मुख्यमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी का हर वक्त अभिनंदन करने के लिए बेताब रहते हैं। मेरा दुर्भाग्य देखिए कि नरेंद्र मोदी से तो क्या, उनके चपरासी तक से भी मेरा कभी मिलना नहीं हो सका। कभी हिम्मत ही नहीं हुई। हमेशा दिल में यही डर समाया रहा कि कहीं मेरा ही उलटे अभिनंदन न करा दिए जाए! फौज-फाटे से घिरे इस आदमी के आसपास मुझ जैसा साधारण आदमी जाने से घबराता है, क्योंकि इशरत जहाँ जैसे साधारण लोगों का इसीलिए चुपचाप अभिनंदन कर दिया गया कि वे पता नहीं क्यों उनसे मिलने जा रहे थे। मैं इशरत जहाँ की तरह कानून से डरने वाला नागरिक हूँ और जब मैं नरेंद्र मोदी के अभिनंदन की बात कहता हूँ तो मेरा आशय सचमुच के अभिनंदन से होता है। उस अभिनंदन से नहीं जिसकी पात्र 19 साल की निर्दोष लड़की इशरत बनी और उसके घरवालों को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उनकी बेटी ने अभिनंदन लायक यश कमा लिया है!मैं नरेंद्र मोदी के गले में गुलाब, सॉरी कमल के कमनीय फूलों की माला डालना चाहता हूँ, उन्हें श्रीफल देना चाहता हूँ और उन्हें एक कश्मीरी शॉल ओढ़ाना चाहता हूँ। बंदे ने मुझ जैसे सफेद बालों वाले नौजवान को खुश कर दिया है। क्या जबर्दस्त क्रांति की है बंदे ने! किसी को कानोकान खबर तक नहीं हुई और जनाब गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बन गए! जैसे उन्होंने उपचुनावों में कांग्रेस की खटिया खड़ी की, वैसे ही उन्होंने एसोसिएशन से कांग्रेस का बिस्तर गोल कर दिया।कांग्रेस के पास न खाट, न बिस्तर। न बैठने की जगह, न वह पृष्ठभाग जो कुर्सी आदि पर बैठता है। इसे कहते हैं गुगली। सोच रहे हैं कि राजनीति की बॉल फेंकी गई है और बॉल चकमा देकर बन गई सचमुच के क्रिकेट की। अब बैट थामे खड़े रहो वंदे मातरम् करते हुए या एक के बाद एक अपनी गिल्लियाँ उछलते देखते हुए। बंदा तो जी चुपचाप आपका सार्वजनिक अभिनंदन कर गया। क्रिकेट में घुसते ही बंदे का रूप निखर आया है। कैसा जेंटलमैन लगने लगा है, जरा देखो तो! कलेजा मुँह को आता है। ऐसे जेंटलमैन के आने के बाद जेंटलमैन का गेम समझा जाने वाला क्रिकेट कितना कृतकृत्य हो उठा है! क्रिकेट को मोदी की जरूरत थी। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन ने एक भी अच्छा क्रिकेटर नहीं दिया, जबकि वडोदरा एसोसिएशन के पठान बंधु छाए हुए हैं। भाई वडोदरा मोदी के गुजरात में थोड़े ही है! मोदी को गुजरात के घर-घर में क्रिकेट को पहुँचाना है। उन्हें क्रिकेट के जरिए अपनी राजनीति को और मजबूत करना है। इतना मजबूत कि पाकिस्तान और तथाकथित पाकिस्तानपरस्त लोग कभी आँख भी न उठा सकें। क्या जज्बा है देशप्रेम का! देश के सेवक कहीं भी हों उन्हें देशसेवा करने से कोई रोक नहीं सकता! पता चला कि क्रिकेट खिलवा रहे हैं और लगे हाथ देशसेवा भी हो रही है! इसे कहते हैं "एक पंथ दो काज सँवारै, हगने गया और तीतर मारै।" ऐसे आदमी पर कौन मर-मिट न जाए! इसीलिए हृदय से अभिनंदन करना चाहता हूँ।