आइए अंटार्कटिका की सैर करें
इस बार विज्ञान के ब्लॉग की चर्चा
यह तथ्य भारतीय समाज के लिए शायद एक हद तक सच्चा है कि आम लोगों में विज्ञान के प्रति रूचि कम ही है। एक ऐसे समय में जब मीडिया से लेकर समाज के हर तबके में क्रिकेट, फिल्म और खाओ -पिओ संस्कृति में खासी दिलचस्पी हो तब विज्ञान की बातें करना खासा ऊबाऊ माना जाता है। इलेक्ट्रॉनिक हो या प्रिंट मीडिया, यदि सरसरी निगाह भी डाली जाए तो यह बाआसानी कहा जा सकता है कि इनमें विज्ञान संबंधी खबरों को बहुत ही कम जगह मिलती है। यदि कोई संस्था या समूह अपने स्तर पर विज्ञान को लेकर कोई कार्यक्रम भी करता है तो वहाँ बहुत कम लोग मौजूद होते हैं। जाहिर है इससे यह निष्कर्ष निकालने में कतई मुश्किल नहीं होती कि विज्ञान में लोगों की दिलचस्पी कम है। इसका एक बड़ा कारण यह माना जाता रहा है कि यह विषय कम समझ में आता है, इसकी भाषा कठिन होती है और इसका मामला इतना पेचीदा होता है कि इसे समझने के लिए भारी सिर खपाना पड़ता था। लेकिन यह शायद आधा सच ही है क्योंकि एक समय था जब दूरदर्शन पर ख्यात खगोलशास्त्री कार्ल सेगल का एक धारावाहिक कॉसमॉस आता था और उसे इतने खूबसूरत और दिलचस्प ढंग से बनाया गया था कि उसे खासे दर्शक नसीब हुए थे। इसी तरह डेविड एटनबरो ने लिविंग प्लेनेट नाम से एक धारावाहिक बनाया था और उसे भी लोकप्रियता हासिल हुई थी। हालाँकि अब नेशनल जियोग्राफिक, डिस्कवरी जैसे चैनल की वजह से विज्ञान और पर्यावरण पर बेहतरीन से बेहतरीन कार्यक्रम आते हैं। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि हिंदी में विज्ञान को लेकर कोई बड़ा और दिलचस्प काम शायद नहीं हुआ है। मराठी में तो वैज्ञानिक जयंत नार्लीकर ने एक से एक साइंस फिक्शन लिखे हैं लेकिन हिंदी में अभी भी विज्ञान साहित्य लगभग नहीं है।
इसलिए कभी-कभी लगता है कि ब्लॉग दुनिया में एक ब्लॉग तो ऐसा है जो सरल भाषा में और दिलचस्प ढंग से विज्ञान की बात करता है। यह ब्लॉग है साइंस ब्लॉगर्स एसोसिएशन आफ इंडिया। इसमें कुछ लोग अपना योग देते हैं। इसमें शामिल हैं- अंकुर गुप्ता, अभिषेक, अभिषेक ओझा, अल्पना वर्मा, जाकिर अली रजनीश, जीके अवधिया, जिशान जैदी, प्रवीण चोपड़ा, अरविंद मिश्र, डॉ. गुरुदयाल प्रदीप, रंजना भाटिया और लवली कुमारी। इन लोगों ने अब तक यानी 24 मार्च तक कुल 51 पोस्ट लगाई गई हैं और इन पर 768 प्रतिक्रियाएँ मिली हैं। यानी एक पोस्ट पर औसतन 15 प्रतिक्रियाएँ। कहा जा सकता है कि यह आँकड़ा संतोषजनक है इस ब्लॉग की पठनीयता भी बताता है। इसमें आप वेधशाला से लेकर अंटार्कटिका की रोचक रोमांचक यात्रा कर सकते हैं, तो खगोल विज्ञान से लेकर कम्प्यूटर की तकनीकी जानकारियाँ भी हासिल कर सकते हैं। डीएनए की खोज से लेकर डीएनए फिंगर प्रिंट की दिलचस्प बातें जान सकते हैं। यही नहीं, पुरातत्व और महिला अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में दुर्लभ जानकारियाँ भी मौजूद हैं। इसके अलावा सामाजिक चेतना, समाज और हम कैटगरी में विचारोत्तेजक पोस्ट भी हैं और साइंस ब्लॉगर्स मीट खबर भी।उदाहरण के लिए रंजना भाटिया की महिला अंतरिक्ष पर पोस्ट पढ़ी जा सकती है जिसमें वे लिखती हैं कि- महिलाओं को अन्तरिक्ष में भेजने का सिलसिला सबसे पहले रूस ने शुरू किया ..16 जून 1963 को पहली महिला वैलन्तीना तेरेस्कोवा अन्तरिक्ष में गई थी ...यह अनुभव किया गया ..कि अन्तरिक्ष अन्वेषण में महिलाएँ अपनी विशिष्ट सरंचना के कारण अधिक अच्छी भूमिकाएँ निभा सकती है ..अब चाहे इस को स्वीकार किया जाए या नहीं कि अन्तरिक्ष अन्वेषण में महिलाओं ने पुरुष के समान ही कार्य किया है ..
यहाँ पर अलबर्ट आइन्स्टीन से लेकर मैडम क्यूरी और चार्ल्स डार्विन से लेकर जर्मन गणितज्ञ जॉर्ज कैंटर पर जानकारीपरक पोस्ट मिल जाएँगी। यहाँ प्रवीण चोपड़ा का एक लेख बहुत ही दिलचस्प और हमारी आँख खोल देने वाला है। वे झूठी मशीनों के झूठे प्रचार, भेड़चाल और अंधविश्वास पर रोचक ढंग से चोट करते हैं और कहते हैं कि मेरा यह मिशन है कि मैं लोगों को जागरूक कर सकूँ। जाहिर है इसके जरिये लोगों वैज्ञानिकता का भाव पैदा होगा और वे ठगे नहीं जाएँगे। वे एक जर्मन मशीन के बहाने लिखते हैं कि सोच रहा हूँ कि क्या इस मशीन से सचमुच ही सब कुछ ठीक हो जाएगा---तो जवाब संतोषजनक मिलता नहीं। लगता है कि पब्लिक को बस उल्लू बनाया जा रहा है? अब रोज़ाना इस इलाज के िलए हर मरीज़ से तीस रुपए लिए जा रहे हैं। इस से कुछ भी तो होने वाला नहीं है। आज मैं अपने एक मरीज़ से कह रहा था कि यार, इस तीस रुपए से तो तेरा परिवार फल खा सकता है !! लेकिन सबसे दिलचस्प पोस्ट है अंटार्कटिका पर। इसमें इस अभियान से लेकर यहाँ पाए जानेवाले सूक्ष्य जीव, पौधे, जीव-जंतुओं के बारे में रोचक जानकारियाँ हैं। विशेषकर यहाँ पाई जाने वाली कुछ पेंगुइन के बारे में। यहाँ इनकी विशेषताएँ हैं, विवरण हैं और यह सब दिलचस्प भाषा के साथ है। इसी तरह भारतीय खगोलविज्ञान के विकास के साथ ही सामाजिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंताएँ दिखाई देती हैं। निश्चित ही यह हिंदी ब्लॉग दुनिया का एक जानकारीपरक और दिलचस्प विज्ञान आधारित ब्लॉग है। इसे पढ़ा जाना चाहिए। ये रहा इसका पता- http://sciblogindia.blogspot.com
लेखक के बारे में
रवींद्र व्यास