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Written By WD

महाविस्फोट के महाप्रयोग

महाविस्फोट महाप्रयोग
स्वर्ण सिन्हा
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ब्रह्मांड की उत्पत्ति की खोज के लिए वैज्ञानिकों का यह महासंगम पहली बार जिनेवा में देखा गया था। इसे चाँद पर अपोलो अभियान के बाद दूसरा बड़ा वैज्ञानिक प्रयास बताया जा रहा है।

हाँलाकि इस महाप्रयोग की तैयारी लगभग एक सौ पचास वर्ष पूर्व से ही होनी शुरू हो गई थी, सिकी नींब सन्‌ 1954 में सर्न लैबोरेटरी की स्थापना के साथ ही शुरू हो चुका था।

लगभग 30 भारतीय वैज्ञानिकों ने इस महाप्रयोग में अपना योगदान दिया है। फोटो मल्टीप्लिसीटी डिटेक्टर (पीएमडी) इस महाप्रयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसका निर्माण भारत में हुआ है। भारत के कई शहरों के वैज्ञानिक अनुदान के साथ-साथ इन्दौर के राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस टेक्नोलॉजी (आर.आर. सीएटी) ने लार्ड हैडरोन कोलाइडर का एक्सीलेटर बनाने में योगदान दिया है।

अभी ऐसी अफवाह उड़ी थी कि बिग बैंग के दौरान प्रोटॉनों की जोरदार टक्कर से प्रलय हो सकता है। इसके चलते ब्लैक होल बन सकते हैं, जिसमें पूरा विश्व समा सकता है, जिसका अर्थ है मानवता का खात्मा।

पर यह सरासर बेसिर पैर की बात है, प्रोटोनों की टक्कर से डरने वाले लोग भूलते हैं कि पृथ्वी इस तरह की टक्कर हर समय झेलती रहती है।ब्रह्मांड के निर्वात वातावरण में पृथ्वी से भी आकार में बड़े कई पिंड रोजाना टकराते रहते हैं तथा इसका हमें पता भी नहीं चलता है।

आज तक वैज्ञानिक ब्रह्मांड के संबंध में हिग्स बोगेन का पता नहीं लगा सके हैं , जिस दिन हिग्स बोगोन का पता चल गया, उस दिन ब्रह्मांड की खोज की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी ।

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ब्रह्मांड से संबंधित कुछ परिभाषिक शब्दावली

1. बिग बैंग - ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में दिया गया एक सिद्धांत, जिसके अनुसार 14 अरब पहले एक महाविस्फोट हुआ था, जिससे इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई।

2. ब्लैक होल - एक ऐसा क्षेत्र, जहाँ पर इतना अधिक चुम्बकीय क्षेत्र बन जाता है कि उससे कुछ भी बाहर नहीं निकल पाता, यहाँ तक कि प्रकाश भी नहीं।

3. डार्क मैटर- संसार में उपस्थित सभी तत्वों में से केवल चार प्रतिशत ऐसे हैं, जिन्हें देखा जा सकता है। बाकी सारे तत्व डार्क मैटर (26 प्रतिशत) और डार्क इनर्जी से मिलकर बने होते हैं। एलएससी से इन डार्क मैटर को जानने में मदद मिलेगी।

4. हैड्रॉन - क्वार्क से निर्मित उस पार्टिकल को हैड्रान कहते हैं, जिसका द्रव्यमान होता है और वे आपस में मजबूती से जुड़े रहते हैं। प्रोटान तथा इलेक्ट्रॉन के प्रकार है।

5. हिग्न बोसोन - एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीटर बग्स ने पहली बार हिग्स बोसोन यानी गांड पार्टिकल के बारे में बताया था। ब्रह्मांड में इसकी मौजूदगी के बारे में एल.एच.सी. मशीन से पुष्टि हो सकती है। समझा जाता है कि पदार्थों में द्रव्यमान के लिए यह जिम्मेदार है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक बिग बैंग यानि महाविस्फोट के कारण गार्ड पार्टिकल बने थे। जिनसे सभी ग्रह एवं तारों का निर्माण हुआ था। महामशीन से इसी गार्ड पार्टिकल की खोज की जानी है। दरअसल हिग्स बोसोन में बोसोन शब्द भारतीय वैज्ञानिक सत्येन्द्रनाथ बोस के नाम है। बोस ही वह भारतीय वैज्ञानिक थे, जिनके शोध को भौतिक जगत ने स्वीकार करते हुए उनके नाम पर एक उप परमाणविक कण का नाम रखा। यह अंग्रेजी भाषा में एक मात्र संज्ञा है, जिसे किसी भारतीय के नाम पर रखा गया।

6. सर्न - फ्रांस एवं स्विट्जरलैंड के बार्डर पर जिनेवा में स्थित पार्टिकल फिजीक्स प्रयोगशाला, यूरोपियन आर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च। फ्रेंच भाषा में इसे काउंसिल फॉर यूरोपियन पार ला रिसर्च न्यूक्लियर कहा जाता है। जिसका छोटा रूप सर्न है।

7. पार्टिकल फिजिक्स - भौतिक विज्ञान की एक शाखा, जिसमें पदार्थ और विकिरण के आधारभूत गुणों और उनके बीच संबंधों का अध्ययन किया जाता है। इसे हाई एनर्जी फिजिक्स के नाम से भी जाना जाता है।
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