- कैलाश नारदबीते सन 1974 की कुहरीले लिहाफ में लिपटी वह सर्द शाम अभी तक मेरी यादों की दराज में दुबकी हुई है विस्मृति की धूल उसे बुहार नहीं पाई है। और न ही ऋषिकेश के उस सुरम्य गंगातट पर अवस्थित आश्रम को, जहाँ डूबते सूरज की परछाई लहरों पर...