ओणम् पर विशेष
ओनाआशंकल.... ओणम की शुभकामनाएँ
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इस सप्ताह तो भारत में त्योहारों का अद्वितीय उल्लास और रौनक दिखाई देगी। सप्ताह की शुरूआत में सोमवार को दक्षिण भारत का सबसे बड़ा त्योहार ओणम् मनाया जाएगा। इसी दिन हिंदी प्रदेशों में लोग सावन के अंतिम सोमवार का व्रत रखेंगे। देश के दक्षिणी हिस्से में जहाँ ओनाआशंकल अर्थात् ओणम् की शुभकामनाओं के स्वर सुनाई देंगे, वहीं हिंदीभाषी प्रदेशों में ओम् नम: शिवाय के स्वर गूँजेंगे।
ओणम् का त्योहार राजा और प्रजा के मध्य आपसी प्रेम का त्योहार है। भारतीय परंपरा के अनुसार राजा के लिए अपनी प्रजा पुत्र के समान होती है। एक राजा के लिए उसकी प्रजा से बढ़कर कोई नहीं होता। राजा और प्रजा के मध्य इसी प्रेमपूर्ण संबंध का प्रतीक है-ओणम्।
प्रजा से मिलने आते है, राजा
ओणम के संबंध में एक पौराणिक कथा बहुत प्रचलित है। इस कथा के अनुसार प्राचीनकाल में केरल में राजा बली का शासन था। राजा बली के राज्य में उनकी प्रजा बहुत खुशहाल थी। राजा बली बहुत बड़े दानवीर थे। एक बार भगवान विष्णु बाल ब्रह्मचारी का रुप धरकर राजा बली के पास गए और उन्होंने राजा बली से तीन कदम भूमि माँगी।
राजा बली ने उनकी माँग सहज ही स्वीकार कर ली और तीन कदम भूमि उन्हें दान देने के लिए राजी हो गए। इसके बाद भगवान विष्णु ने विराट रूप ले लिया उन्होंने अपने एक कदम में पूरी और धरती और दूसरे में पूरा पाताल नाप लिया। इसके बाद उन्होंने बली से पूछा कि तीसरा कदम कहाँ रखूँ ? बलि ने कहा कि प्रभु तीसरा कदम आप मेरे मस्तक पर रख दें।
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वर्ष में एक बार जब राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने आते हैं, उनके आगमन की खुशी में ओणम् का त्यौहार मनाया जाता है। केरलवासियों की मान्यता है कि आज भी अदृश्य रूप में ही सही पर राजा बली अपनी प्रजा से मिलने आते है।
कैसे मनाते हैं, ओणम्
ओणम् पर राजा बली के आगमन की खुशी में केरलवासी अपने द्वारा पर फूलों की खूबसूरत रंगोलियाँ सजाते हैं। पारंपरिक गीत गाए जाते है। राजा महाबली को चावल के बने विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया जाता हैं।
ओणम् के व्यंजन
इस दिन चोर (चावल), परिप (दाल), तोरन(पत्तागोभी की सब्जी), अडाप्रदमन (खीर), उदेरी (केले की चिप्स), इंजीकारी (अदरक की चटनी) आदि व्यंजनों का महाबली को भोग लगाया जाता है। ये सारे पकवान सजा कर एक कमरे में रख दिए जाते हैं। उसके बाद कमरे का दरवाजा बंद कर दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि बंद कमरे में महाबली आकर प्रसाद का भोग लगाते हैं।
